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नई दिल्ली: नीरव मोदी-पीएनबी घोटाला उजागर होने से आठ महीने पहले ही इनकम टैक्स जांच रिपोर्ट में मोदी द्वारा बोगस खरीद, शेयरों का भारी मूल्यांकन, रिश्तेदारों को संदिग्ध भुगतान, संदिग्ध ऋण जैसे कई मामले उठाए गए थे. हालांकि इस बेहद जरूरी रिपोर्ट को अन्य एजेंसिंयों के साथ साझा नहीं किया गया.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2002 के गुजरात दंगों के सिलसिले में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दी गयी क्लीनचिट को चुनौती देने वाली ज़किया जाफ़री की याचिका जनवरी के तीसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दी है.

नई दिल्ली/बुलंदशहर: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कथित गोकशी की अफ़वाह के बाद बुलंदशहर के स्याना गांव में हुई हिंसा की घटना में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और सुमित कुमार नाम के युवक के मारे जाने की घटना को लेकर मंगलवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किए.

दिल्ली - हर दिन लाखों यात्री दिल्ली रेलवे स्टेशन से यात्रा करते हैं साथ ही यात्रियों को किसी तरह की परेशानी ना हो उसका पूरा ध्यान RPF रखती है वहीं पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर रविवार को RPF के प्रभारी के नेतृत्व में RPF के स्टाफ ने लोगों को जागरूक किया कि वह किस तरह से RPF की आंख और कान बन सके और किस तरह से वह सतर्क रहते हुए दूसरी यात्रियों की भी जान बचा सकते हैं साथ ही अलग अलग तरीके से कैसे RPF से संपर्क कर क्राइम का ग्राफ कम कर सकते हैं.

 


रेल यात्री जागरूकता अभियान की हुई शुरुआत

  पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन में आर.पी.एफ प्रभारी मनोज कुमार के मार्गदर्शन में स्टाफ द्वारा रेल यात्री जागरुकता अभियान आयोजित किया गया और यात्रियो को बताया गया कि  रेल यात्रा  के दौरान किसी भी अंजान व्यक्ति का दिया सामान ना खाऐं और ना ही खिलाऐं हो सकता हैं. हो सकता है वो जहरखुरानी गिरोह के लोग हो,जो आपको किसी भी खाद्य पदार्थ जैसे चाय,पानी,कोल्ड्रिंक, केक,बिस्कुट,फल आदि  सामान में नशीला पदार्थ मिला कर आपको खिलादें और आपका सारा सामान लूट सकते हैं.जिससे आपको काफी नुकसान हो सकता है और आपकी जमा पूंजी जा सकती है.

पायदान पर न यात्रा करें न ही सेल्फी लें

आरपीएफ के पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्रभारी मनोज कुमार ने रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि रेल यात्रा के दौरान चलती ट्रेन में दरवाज़े, पायदान और छत पर यात्रा ना करें साथ ही, दरवाजे,पायदान, छत पर  खडे़ होकर सेल्फी लेने का प्रयास ना करें. ऐसा करने पर एक छोटी सी गलती से आपकी जान भी जा सकती हैं ओर ऐसा करना कानून जुर्म है,रेल यात्रा के दौरान किसी बच्चे को संदिग्ध हालत में देंखे तो तुंरत चाइल्ड हेल्प लाईन 1098 पर फोन कर जानकारी दें,बिना टिकट यात्रा ना करें,प्लेट फोर्म व ट्रैन स्वच्छ रखने में रेल प्रसाशन की मदद करें,गाडियो में चैन पुलिंग ना करे ऐसा करना कानून जुर्म है, भारत में रेल यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी हो आप तुरंत आर.पी.एफ हेल्प लाइन  नंबर 182 और जी.आर.पी हेल्प लाइन नंबर1512 पर फोन कर सहायता प्राप्त कर सकते है.  प्लेटफॉर्म पर मौजूद  तथा आने व जाने वाली गाड़ियों में यात्रियों को पेम्फलेट, बेनर आदि के माध्य्म से प्रचार प्रसार किया गया.

खोये लोगों को परिवार से मिलाती है आरपीएफ

वहीं आरपीएफ लोगों को जागरूक तो करता ही है साथ ही साथ खोये लोगों को भी उनके परिवार से मिलाता है. हाल ही में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के मेन हॉल में उप-निरीक्षक आर बी एल मीना को 3 मासूम बच्चे मिले, जब उनसे पूछताछ की गई तो ये ये तीनों बच्चे दिल्ली के ही रहने वाले थे, जिनमे पहला समर था जो 12 साल का है और राजा पुुुर में रहता है वहींं दूसरा सागर है जिसकी उम्र 12 साल है और वो मंगोल पूरी का रहने वाला वहीं तीसरा बच्चा अरुण है जो कि सिर्फ 10 साल का है और ये भी मंगोल पूरी का ही रहने वाला है. जब आरपीएफ कर्मी ने इनसे इनके बारे में पूछा तो उन्होंने घर का नम्बर बताया जिसके बाद इनके परिवार वालों को सूचित किया गया और कानूनी औपचारिकता के बाद इन्हें परिवार को सौंप दिया गया.

वहीं एक एनजीओ के प्रतिनिधि अर्जुन सिंह भी एक 9 वर्षीय बच्चे को लेकर आरपीएफ प्रभारी के पास पहुंचे जिसके बाद फौरन आरपीएफ कर्मियों ने उस बच्चे से उसके परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी ली और आखिर में आरपीएफ ने उस 9 वर्ष के बच्चे मोहम्मद ज़ाहिद को भी उसके परिवार से मिला दिया

 

 

 

 

दिल्ली - एनएसयूआई अध्यक्ष फ़िरोज़ खान, रुचि गुप्ता, जॉइंट सेक्रेटरी एआईसीसी और जयकिशन पूर्व एमएलए कांग्रेस ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सिद्धांतों का प्रचार किया. इनके साथ हजारों की तादाद में छात्र छात्राएं मौजूद थे .साथ ही पूरे दिल्ली यूनिवर्सिटी के हर कॉलेज के बाहर एनएसयूआई की जीत का परचम छात्रों ने लगाया.

दिल्ली - हाल ही में मुस्लिम युवा आतंकवाद विरोधी समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शकील सैफी ने हिंदू युवा वाहिनी के खिलाफ आवाज बुलंद की थी और PM राष्ट्रपति और गृहमंत्री तक इस संगठन को बंद करने की मांग की थी लेकिन जैसे ही शकील सैफी ने हिंदू युवा वाहिनी के खिलाफ आवाज उठाई उसी के बाद से उन्हें धमकियां भी आने लगी. जन्माष्टमी के दिन शकील सैफी मुंबई के होटल में थे जभी उनके पास एक नेट से कॉल आती है और उन्हें जान से मारने की धमकी और उनके घर और परिवार के सदस्यों को बम से उड़ाने की धमकी एक शख्स देता है जो अपने आप को हिंदू युवा वाहिनी का सक्रिय सदस्य बताता है जैसे ही उस शक्स ने शकील सैफी को धमकी दी उसी के बाद फौरन शकील सैफी ने जुहू थाने में FIR दर्ज करा दी और यह पहली बार हुआ है कि जब हिंदू युवा वाहिनी के खिलाफ मुंबई में FIR दर्ज हुई हो.

 

योगी आदित्यनाथ मेरी हत्या करा सकते हैं - शकील शैफी

शकील सैफी ने दिल्ली में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा की उन्होंने जो देश मे एकता की बात की थी साथ ही हिन्दू युवा वाहिनी के यूपी में अत्याचार को बंद करने की जो आवाज़ उठाई थी उसी से डरकर उनके एक कार्यकर्ता ने कॉल करके धमकी दी है और कहा है कि अगर अब कभी हिन्दू युवा वाहिनी के खिलाफ कुछ बोला तो अपनी जान से हाथ धो बैठोगे साथ ही घर और परिवार को बम से उड़ाने की धमकी तक दी है. शकील सैफी ने कहा कि वह इस तरीके की धमकियों से नहीं डरते हैं और उन्हें शक है कि हिंदू युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी आदित्यनाथ इस धमकी के पीछे हैं और वहीं उनकी हत्या भी करा सकते हैं लेकिन वह इस तरह की धमकियों से नहीं डरने वाले हैं वह देश के लिए और देश की एकता के लिए अपनी जान भी कुर्बान कर सकते हैं.

देखें वीडियो क्लिक करके क्या कहा शकील सैफी ने योगी के बारे में

दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भी दी शिकायत

 

शकील सैफी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को लिखित में इस धमकी की शिकायत भी थी शकील सैफी का आउटर दिल्ली में घर है जिसकी वजह से उन्होंने दिल्ली पुलिस को इस धमकी की शिकायत दी है वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गृहमंत्री राजनाथ सिंह यूपी के राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक को इस धमकी की शिकायत लिखित रूप में दी गई है और मुंबई में तो FIR तक दर्ज हुई है.

12 लाख दलित, ओबीसी,मुस्लिम, पिछड़े वर्ग का मिला शकील सैफी को साथ

 

जैसे ही शकील सैफी को हिन्दू युवा वाहिनी की तरफ से धमकी मिली उसी के फौरन बाद देश भर से शकील सैफी के समर्थन में लाखों लोग आने लगे साथ ही हिन्दू युवा वाहिनी के खिलाफ पहली बार शकील सैफी के नेतृत्व में आवाज उठने लगी वही युवा शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि कुमार गौतम प्रवक्ता सुभाष सागर समेत कई संगठन के लोग दिल्ली में शकील सैफी से मिलने आए और उन्हें अपना समर्थन देने की बात की साथ ही साथ दिल्ली में एक बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की भी बात उन्होंने की साथ ही तकरीबन 1200000 से ज्यादा दलित ओबीसी पिछड़े वर्ग SC ST मुस्लिम आदि लोग शकील सैफी के साथ देश भर से खड़े हो चुके हैं.

 

भारत, ईरान के साथ आर्थिक सहयोग जारी रखेगाः अजीत डोभाल

 

तेहरान -ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ईरान और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग में विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया है।

 

तेहरान में दोनों पक्षों के बीच होने वाली इस मुलाक़ात में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमख़ानी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा के अतिरिक्त राजनैतिक, आर्थिक, व्यापारिक और ट्राज़िट के क्षेत्रों में सहयोग में अधिक विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया।

 

उन्होंने ईरान और भारत के संबंधों में विस्तार दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाओं की प्रभावी भूमिका की ओर संकेत करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को अधिक से अधिक विस्तृत किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमख़ानी ने कुछ देशों के विरुद्ध अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंधों को अत्याचारपूर्ण बताया। इस मुलाक़ात में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी जो तेहरान सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरान के दौरे पर हैं, इस सम्मेलन के आयोजन और ईरान की मेज़बानी की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच वार्ता प्रक्रिया के जारी रहने और द्विपक्षीय समझौतों को आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

उन्होंने कहा कि भारत, आर्थिक क्षेत्र में ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा और उनका देश ईरान में पूंजीनिवेश में रुचि रखता है

ब्यूरो रिपोर्ट- ईद ए ग़दीर की हर जगह बहुत बहुत मुबारक दी जा रही है लेकिन आखिर ईद ए ग़दीर है क्या? आइये अब ज़रा बताते हैं आखिर है क्या ये सबसे बड़ी ईद.

 

मन कुनतो मौला फा आज़ा अलीयुन मौला

 

जिस जिस का मैं मौला उस उस का अली (अ.स.) मौला

 

पैगम्बर मोहम्मद (स.अ.व.स.) जिस वक्त हज करके वापस लौट रहे थे तो उस वक्त रास्ते में एक जगह पड़ती है जिसका नाम था खुम (जिसे अब अल जोहफा के नाम से जाना जाता है)...वहां एक लाख से ज़्यादा सहाबा के बीच नबी (स.अ) ने खुदा के हुकुम से हज़रत अली अ.स. (जो उनके चाचा ज़ात भाई और दामाद भी थे) को अपना जानाशीन बताया...

 

उन्होंने(स.अ) कहा था कि अली (अ,स.) का दोस्त मेरा दोस्त है..और जो इनसे दुश्मनी करेगा वो मुझसे दुश्मनी करेगा..और जिसने मुझसे दुश्मनी की यानि उसने खुदा से दुश्मनी रखी...

 आखिर क्यों है ईरान में इतनी बरकत, किस के सदके में जीतता है ईरान - देखिये वीडियो

ये पूरा वाक्या 18 ज़िल्हिज्जा को हुआ था..जिसके बाद से सभी वहां मौजूद लोगों ने ह. अली (अ.स.) को मुबारक बाद दी..इसमें खुद सहाबी हज़रत उमर, उस्मान भी मौजूद थे, जिन्होंने भी हज़रत अली अस को मुबारकबाद दी.

 

तो इसलिए आज 18 ज़िलहिज्जा है जो इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक साल का आखिरी महीना होता है...तो अब इसलिए अपने नबी (स.व.स.) की कही गई बात को मानते हुए सभी  ईद ए ग़दीर की मुबारक बाद पेश करते हैं..क्योंकि  नबी (स.अ.) की क़ौल खुदा की बात होती है...और 

हज़रत अली अस की विलायत के ऐलान के बाद ही ख़ुदा ने कहा कि अब दीन मुकम्मल हुआ।

 क्या क्या करते हैं इस ईद में

देखा जाए तो इस्लाम दीन ही पूरा न होता अगर ये दिन न होता क्योंकि इसी दिन इस्लाम मुकम्मल हुआ था इस हिसाब से मुसलमान के लिए सबसे बड़ी ईद आज यानी ईद ए ग़दीर है. इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, ग़ुस्ल करते हैं,खुशबू लगाते हैं अपने बच्चों, समेत दूसरे लोगों को ईदी देते हैं, साथ ही इस दिन ज़ोहर की नमाज़ से पहले आमाल भी होते हैं और नमाज़ भी। इस दिन मुस्लिम रोज़ा भी रखते है.और खुशियां मनाते हैं.

 

एक बार फिर से ईद ए ग़दीर बहुत बहुत मुबारक हो आप सभी को.

 

#ईद_ए_ग़दीर

#Eid_e_Ghadeer

दिल्ली - केरल में बाढ़ की वजह से तकरीबन 325 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग बेघर हो गए है। ऐसे में ईरान के दिल्ली में कल्चर हाउस और एम्बेसी ने केरल के लोगों की मदद करने के लिए ईरान सरकार और IKRF के ज़रिए पैसे यहां भेजने के लिए प्रपोजल भेजा है। ईरान जहां जहां लोग आपदा, युद्ध, या परेशानी की वजह से परेशान होते हैं तो वहां ईरान इंसानियत का पैगाम देकर उन लोगों की मदद करता है। 
 
आयतुल्लाह खामनेई के नुमाइंदे और डिप्टी एम्बेसडर ने प्रपोज़ल भेजा
ईरान कल्चरल हाउस दिल्ली में शुक्रवार शाम आयतुल्लाह खामनेई केेे भारत में नुमाइंदे आयतुल्लाह आगा मेहंदीपुर और ईरान एंबेसी के डिप्टी एंबेसडर मसूद रिज़वानी  
प्रेस से मुखातिब हुए। केरल बाढ़ के सवाल पर जब पूछा गया कि जैसे इमाम खुमैनी रिलीफ फंड दुनिया भर में मज़लूम लोगों की मदद करता है तो क्या इंडिया में भी केरल के अंदर बाढ़ से परेशान लोगों की मदद करेगा तो दोनों अधिकारियों ने कहा कि हम ज़रूर मदद करने के लिए आगे बढ़ेंगे। ईरान पर इतने सेंक्शन लगे हुए है लेकिन फिर भी इंसानियत को देखते हुए ईरान मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। ईरान सरकार और इमाम खुमैनी रिलीफ फंड को इसका प्रोपोजल भेजा जाएगा।
 
आईएस को खत्म करने वाला ईरान, इसीलिए अमेरिका लगा रहा है प्रतिबंध -आग़ा मेंहदीपुर
आयतुल्लाह आग़ा मेहंदीपुर ने कहां की सीरिया और इराक से ISIS का खात्मा ईरान ने किया था जिसकी वजह से अमेरिका की सभी मंसूबों पर पानी फिर गया था और इसी वजह से अब अमेरिका इरान पर प्रतिबंध लगा रहा है लेकिन इरान हमेशा आतंकवाद के खिलाफ खड़ा रहेगा चाहे वह कहीं पर भी हो हम सीरिया इराक यमन, फिलिस्तीन समेत विश्व के सभी मजलूम लोगों के साथ खड़े हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह था की अमेरिका के जरिए हमारी 8 साल तक इराक से जंग चली लेकिन उस वक्त भी हमने बोस्निया जैसे देश को मदद की फिलिस्तीन के लोगों के साथ ईरान खड़ा हुआ है। 
 
"ईरान के खिलाफ हो रही हैं साजिश"
आगा मेहंदीपुर ने कहा कि ईरान पर इतने प्रतिबंध लगने के बाद भी इरान तरक्की करता गया वहीं ईरान के सिवा अगर कोई और देश होता तो वह 2 से 3 महीने में ही उन लोगों के सामने घुटने टेक देता लेकिन इरान की जनता अब अपने पैरों पर खड़ा होना सीख गई है और आयतुल्लाह खुमैनी के इन्किलाब के बाद हमने अपनी ताकत बड़ा ली है। ईरान ने न्युक्लियर परमाणु डील से लेकर हर एक डील को बखूबी निभाया है और उसे नहीं तोड़ा जिस की वजह से अब अमेरिका नए तरीके से ईरान के ऊपर प्रतिबंध लगाने की योजनाएं बना रहा है।
ईरान से साजिश के लिए सऊदी को सामने लाया गया है जिसका नक्शा इसरायल के पास है, इज़रायल कहता है कि उसके जासूस ईरान में हैं और वो हर चीज़ पर नज़र रखता है इसीलिए नक्शा इज़रायल बना रहा है वहीं इस सब की कमान अमेरिका के हाथों में हैं।
 
ईरान अब 40 साल पुराना वाला नहीं - आग़ा मेंहदीपुर
आयतुल्लाह खामनेई के भारत मे नुमांइदे आयतुल्लाह आग़ा मेंहदीपुर ने कहा कि दुश्मन देश जान लें कि अब ईरान 40 साल पुरानी ताकत वाला देश नहीं अब ईरान की ताकत कई गुणा बढ़ गयी है। बड़ी फौज के साथ साथ इंफ्रास्ट्रक्चर समेत हर ताकत ईरान में बढ़ गयी है। ईरान में 2 करोड़ बसीजी हर वक़्त देश के लिए तैयार रहते हैं। वहीं अमेरिका भी अब उतना ताकतवर नहीं है जितना वो पहले था। 

 
तेहरान- हज़रत मोहम्मद साहब ने 18 ज़िल्हिज्जा को अरब- गैर अरब के तकरीबन 1 लाख से ज़्यादा लोगों को ग़दीर के मैदान में कहा था कि मैं तुम्हारा आखिरी नबी सव हूँ और मेरे बाद तुम्हारे पहले इमाम अली अस होंगे और इन्ही की 11 औलाद क़यामत तक तुम्हारे साथ रहेंगी।
हज़रत अली अस का नजफ़ इराक में रोज़ा है, दूसरे इमाम हसन अस सऊदी तो इमाम हुसैन अस कर्बला में शहीद हुए। इसी तरह हर इमाम अलग अलग जगह शहीद हुए।
 
लेकिन सिर्फ एक ही इमाम हैं जो ईरान की सरजमीं पर शहीद हुए और वो हैं आठवें इमाम अली रज़ा अस। जी हां या ये कहूँ इनके पैरों के सदके में ही पूरे ईरान में बरकत, खुशहाली और इंसानियत की राह दिखती है। एक भिखारी आपको ईरान में नहीं दिख सकता और न ही कोई आपसे कोई चंदा, ढोंग आदि करता नजर आएगा। 
 
वहीं उनका दस्तरखान इतना बड़ा बिछता है कि सुबह से रात तक 15 हज़ार लोग हर रोज़ पेट भर खाना खा कर जाते हैं।
 
 
 
आइये अब ज़रा इमाम अली रज़ा अस की ज़िंदगी के बारे में बताते हैं आपको
 
आपका नाम अली और लक़ब रज़ा, साबिर, ज़की और वली थाl 11 ज़ीक़ादा सन 148 हिजरी में आपकी विलादत हुई और 23 ज़ीक़ादा या सफ़र की आख़िरी तारीख़ को सन 203 हिजरी में शहादत हुई, आपकी उम्र 55 साल थी।
छठे इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. की शहादत भी उसी 148 हिजरी में 15 या 25 शववाल को हुई यानी इमाम रज़ा अ.स. की विलादत से 15 या 25 दिन पहले हुई, इसीलिए आप फ़रमाया करते थे कि काश मैं अपने बेटे को देख लेता जो आलिमे आले मोहम्मद होग।
ज़ाहिर है कि इस्लामी जगत के सबसे बड़े उस्ताद और चार हज़ार ज़बर्दस्त आलिमों के उस्ताद की तरफ़ से ऐसी उपलब्धि हासिल करना बहुत बड़ी फज़ीलत है जिससे अंदाज़ा होता है कि सात नस्लें गुज़र जाने के बाद भी अली अ.स. के कमाल और उपलब्धियों में फ़र्क़ नहीं आया है, पहला अली इल्म के शहर का दरवाज़ा था तो यह अली भी आलिमे आले मोहम्मद है।
 
 
आपके दौर का हाकिम और ख़ुद को मुसलमानों का ख़लीफ़ा कहने वाला भी आपको ज़मीन पर सबसे बड़ा आलिम कहता था और या सय्येदी कह कर पुकारता था, सन 200 हिजरी में जब उसने आपके उत्तराधिकारी होने का ऐलान किया तो इन शब्दों में किया था कि अली इब्ने मूसा (अ.स.) अफ़ज़ल, आलम और तक़वा वाले हैं इसलिए वह इस पद के ज़्यादा हक़दार हैं और इसी बात पर 33 हज़ार के मजमे के बीच आपकी बैअत का अहद लिया गया था।
इससे पहले आपका इल्म और फ़ज़्ल कुछ ऐसा था कि जब आप नेशापूर से गुज़रे तो 24 हज़ार इल्मे हदीस के माहिर क़लम और दवात लेकर जमा हो गए कि आपसे हदीस नक़्ल करेंगे और आपने एक ख़ास इस्मत के सिलसिले के हवाले से इस हदीस को बयान किया था कि ला इलाहा इल्लल्लाह मेरा क़िला है जो इसमें आ गया वह मेरे अज़ाब से बच गया, इस हदीस के सिलसिले को देख कर इमाम अहमद इब्ने हमबल ने कहा था कि यह सिलसिला अगर किसी पागल और दीवाने पर पढ़ कर दम कर दिया जाए तो उसका पागलपन दूर हो जाएगा।
 
साजिश के तहत शहीद किया इमाम को
हारून रशीद की दो बीवियां थीं एक अरब की थी जिससे अमीन पैदा हुआ और एक कनीज़ जिससे मामून पैदा हुआ, दोनों के बीच बाप के ही ज़माने से सत्ता को लेकर खींचातानी शुरू हो गई थी और एक के साथ अरब वाले हो गए एक के साथ अजम (अरब के अलावा लोग) हो गए जिसकी वजह से हारून ने सत्ता को दो हिस्सों में बांट दिया और दोनों को एक एक हिस्सा दे दिया, लेकिन इसके बाद दोनों भाईयों में जंग हुई और मामून ने जंग जीत ली लेकिन अरबवासियों में विद्रोह शुरू हो गया जिसको दबाने के लिए मामून ने नई चाल चली कि इमाम रज़ा अ.स. को उत्तराधिकारी या बादशाह बना दिया जाए, इसलिए आपको मदीने से बुला कर आपके सामने हुकूमत पेश की, आपने फ़रमाया कि अगर तेरी हुकूमत अल्लाह की ओर से है तो तुझे किसी दूसरे को देने का हक़ नहीं और अगर जनता ने तुझे सत्ता पर बिठाया तो तुझे हुकूमत लेने का हक़ नहीं।
मामून ने मजबूर हो कर उत्तराधिकारी बनने की पेशकश की और दबाव डाला कि यह पद आपको क़ुबूल करना ही होगा वरना आपकी ज़िंदगी ख़तरे में पड़ जाएगी जिसके कारण इमाम अ.स. ने इस पद को इस शर्त पर क़ुबूल किया कि आप हुकूमत के मामलात में दख़लअंदाज़ी नहीं करेंगे।
सात रमज़ान सन 201 हिजरी को मजबूर हो कर उत्तराधिकारी बनने को क़ुबूल किया और एक शव्वाल को मामून ने ईद की नमाज़ पढ़ाने के लिए कहा, जिसके बाद इमाम अ.स. पूरी इमामत की शान के साथ नमाज़ पढ़ाने निकले पूरी फ़ेज़ा तकबीर के नारों से गूंज रही थी, यह सब देख कर मामून ने आपको वापस बुला लिया कि कहीं हुकूमत हाथ से न निकल जाए। 
हर इंसान इमाम को चाहता था और इमाम के साथ लब्बेक कहने लगा जिसे देखकर मामून ने साजिश के तहत इमाम को ज़हर दे दिया और आखिरी में आपकी शहादत हो जाती है। 
 
3 करोड़ लोग आते हैं हर साल 
 
जहां आपको ज़हर दिया गया उस जगह को अब मशहद कहते हैं और वहीं इमाम अली रज़ा अस का रौज़ा भी है। इमाम के रौज़े की ज़्यारत करने के लिए तकरीबन 3 करोड़ से ज़्यादा लोग हर साल पूरी दुनिया से यहां आते हैं। कई एकड़ में इमाम अली रज़ा अस का रौज़ा है। जहाँ पर एक मिनट भी ऐसा नही जाता जब रौज़ा खाली हो। हर वक़्त रौज़ा भरा ही रहता है चाहे दिन हो या रात या पूरे साल। 
 
                    इमाम अली रज़ा अस के दस्तरखान पर खाना खाते हुए ज़ायरीन
 
इमाम रज़ा अस का दस्तरखान, एक निवाले के लिए तरसते हैं लोग
इमाम अली रज़ा अस ने अपनी ज़िंदगी में ही अपने नाना रसूल ए ख़ुदा स व अ की सुन्नत पर चलकर, अपने जद हज़रत अली अस, इमाम हसन अस समेत हर सभी इमाम जैसे ही खुद भी दस्तरखान लगवाते थे जिसमें हर धर्म, हर कोई व्यक्ति आकर खाना खा सकता था। और अब भी इमाम अस के पैरों पर चलते हुए तकरीबन 40 साल से ज़्यादा का वक्त हो गया है यानी जबसे आयतुल्लाह रूहुल्लाह खुमैनी साहब ने ईरान को आज़ादी दिलाई थी तबसे हर दिन यहां तकरीबन 15 हज़ार से ज़्यादा लोग खाना खाते हैं। और खाना भी ऐसा की किसी फाइव स्टार होटल तक मे ऐसा खाना नसीब न हो। इतिहासकार कहते हैं कि खुद गुरु नानक साहब भी मशहद शहर में रहे थे और उन्होंने यहां पर ये दसतरखान लगते हुए देखा था जिसके बाद उन्होंने ने भी हिंदुस्तान में भी लंगर के नाम से खाना खिलाना शुरु किया। साथ ही गरीब नवाज़ साहब ने भी इमाम से ही सिखा था।
 
 
इमाम अली रज़ा अस की औलादों को ही कहते हैं रिज़वी
 
आपके उत्तराधिकारी बनते ही पूरे इस्लामी जगत में आप मशहूर हो गए आपके बाद के इमामों को इब्ने रज़ा के नाम से याद किया जाने लगा बल्कि आपकी औलाद को रिज़वी सादात में शुमार किया जाने लगा, क्योंकि आपकी औलाद में लड़कों में इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. के अलावा कोई और नहीं था इसलिए आपकी औलाद तक़वी या जवादी कही जाने लगी

V.o.H News


 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार इमरान खान ने कहा कि उनकी बहुत इच्छा है कि वह ईरान का सफर करें और इस देश की ऐतिहासिक विरासत को निकट से देखें । इमरान खान ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थायित्व के लिए ईरान के प्रयास बहुत सराहनीय है हम क्षेत्र के बदलते घटनाक्रम को लेकर ईरान की चिंता को अच्छी तरह समझते हैं।  उन्होंने कहा कि हम सऊदी अरब और तेहरान के संबंधों में सुधार लाने के लिए मध्यस्था करने को तैयार हैं।  हम अपने सभी पडोसी देशों के साथ दोस्ताना और मैत्रीपूर्ण संबंध चाहते हैं पाकिस्तान का आर्थिक विकास हमारा पहला उद्देश्य है और हम इस क्षेत्र में ईरान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों का फायदा उठाएंगे। 

V.o.H News


 

ईरान से चाहे कितनी ही इसके विरोधी नफरत कर लें लेकिन इस देश में रहने वाले लोगों को इतनी आसानी से इतनी आज़ादी नही मिली है। नफरत की कई वजह हो सकती हैं। शिया निज़ाम, सऊदी अरब, अमेरिका या इज़रायल से ईरान की दुश्मनी। या फिर सीरिया, यमन, लेबनान, अफ़ग़ानिस्तान, फिलिस्तीन, और ईराक़ में ईरान की फौजी मौजूदगी।

अपनी नफरत के पर्दे को एक मिनट के लिए हटाकर इन छह तस्वीरों को एक नज़र देखेंगे तो नफरत की दीवार के पार अपने पैरों पर खड़े मुसलमान और दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताक़तों को ललकारते नौजवान भी हैं। दुश्मनी भरे घर के आंगन में आत्मसम्मान और थोड़ा सा गर्व महसूस करना है तो इन्हें ज़रूर देखिए।

इनमें दो तस्वीरें तेहरान के मौहल्ला जमारान की एक तंग गली और दूसरी उसमें बने एक कमरे के स्टूडियों अपार्टमेन्ट नुमा घर की हैं। इस घर में ईरानी क्रांति के बाद इस क्रांति का नेता रहा करता था।

एक तस्वीर अमेरिकी एम्बेसी की है। इसपर क्रांति के बाद ईरानी छात्रों ने क़रीब 450 दिन क़ब्ज़ा रखा। आज ये साम्राज्यवाद के ख़िलाफ दुनिया भर के संघर्ष का एक बड़ा प्रतीक है।

एक तस्वीर तेहरान की शहरी हद से थोड़ा दूर बने क़ब्रिस्तान बहिश्ते ज़ैहरा की है। इस क़ब्रिस्तान में दो लाख से ज़्यादा शहीद रहते हैं जिन्होंने ईरानी क्रांति, ईरान-इराक़ युद्ध, लेबनान, सीरिया, यमन, अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष के अलावा दुनिया के अलग अलग हिस्सों में इज़रायल या अमेरिकी ख़ुफिया तंत्र/सेना के हाथों जान गंवाई है।

इसमें लाखों गुमनाम शहीद हैं जिनकी क़ब्र पर फरज़ंदे रूहअल्ला यानि रुहअल्ला ख़ुमैनी के बेटे लिखा है। एक आज़ादी स्क्वायर है यानि क्रांति की यादगार।

और एक तस्वीर उस शख़्स की घर वापसी की भी है जिसे अमेरिकी समर्थन वाली सरकार ने घर से बेघर कर दिया था। 15 साल बाद जब ये शख़्स लौट कर आया तो ईरान ही नहीं दुनिया की तारीख़ में कई नए अध्याय जुड़ गए।

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार ज़ैग़म मुर्तज़ा ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर लिखा है)