Top Stories

Grid List

नौगावां सादात:  जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आंतकी हमले में सीआरपीएफ के जवानों के शहीद होने की घटना के बाद लोगों में रोष का आलम है। जिला अमरोहा की मुस्लिम आबादी नौगावां सादात में शुक्रवार को भगत सिंह सेवा दल के बैनर तले लोगों ने पाकिस्तान और आतंकवाद के पुतले को चप्पलों से पीटते हुए आग के हवाले कर दिया गया। और मौन वृत्त रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।  भगत सिंह सेवा दल के कार्यकर्ताओ ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए पाकिस्तान और वहां के प्रधानमंत्री का पुतला फूंकते हुए आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिये जाने की मांग करते हुए आवाज बुलंद की।  

दिल्ली – पूरे देश में जहां गणतंत्र दिवस समारोह मनाया गया वहीं दिल्ली पुलिस ने अपने थानों में भी गणतंत्र दिवस का समारोह मनाया.. दिल्ली के भलस्वा डेरी थाने में गणतंत्र दिवस समारोह मनाया गया. जिसमें ज़िले के एसीपी, एसएचओ, विधायक एवं निगम पार्षद समेत स्थानीय निवासी भी शामिल हुए..

वहीं इस प्रोग्राम को पूरा सहयोग सरुप नगर एसीपी दिनेश शर्मा ने किया.. जिसमें उन्होंने देश भक्ति गीत के साथ साथ देश के प्रति किस तरह से हर एक इंसान को अपना तन मन लगा देना चाहिए भी दिखा.. वहीं आपको बता दें इस प्रोग्राम में छोटे-छोटे बच्चों ने भी भाग लिया और आसपास के इलाकों के लोग भी वहां पर भारी मात्रा में आए किसी ने देश भक्त गाने पर डांस किया तो किसी ने देश भक्ति की दास्तान सुनाई ...

 

वहीं इस प्रोग्राम में अलीपुर के एसीपी रजनीश, बवाना के एसीपी सौरभ चंद्र, बादली के एसीपी धीरेंद्र समेत आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के सभी एसएचओ एक साथ भलस्वा डेरी थाने में नजर आए.. पुलिस प्रशासन के साथ-साथ क्षेत्र के विधायक अजेश यादव निगम पार्षद सुरेंद्रर खर्ब,निगम पार्षद विजय भगत आरडब्ल्यूए के प्रेसिडेंट डॉ आर्य संजय एनक्लेव के डॉ विजय जिंदल भागीरथ गोपाल झा समेत कई बुजुर्गों और बच्चों ने गणतंत्र दिवस समारोह को दिल्ली पुलिस के थाना भलस्वा डेरी में मनाया ...यह पूरा सेलिब्रेशन भलस्वा डेरी के एसएचओ इंस्पेक्टर अजय ने रखा था जिसका नेतृत्व एसीपी स्वरूप नगर दिनेश शर्मा ने किया था... वहीं आपको बता दे की संजय एंक्लेव आरडब्लूए मेंबर्स ने बच्चों को गिफ्ट भी बांटे जिससे बच्चों के अंदर भी एक आत्मविश्वास बढ़ गया की पुलिस थाने के अंदर भी हमारे ही साथी होते हैं जो हमेशा हमारी मदद के लिए 24 घंटे तैयार रहते हैं और किसी भी परेशानी के वक्त हम पुलिस से मदद ले सकते हैं...

वहीं अगर इसी तरीके से दिल्ली पुलिस और आम जनता के बीच ऐसे प्रोग्राम होते रहेंगे तो हर एक इंसान दिल्ली पुलिस से और भी करीब होता जाएगा और किसी भी परेशानी में वह परेशान नहीं होगा और दिल्ली पुलिस को अपना साथी ही मानता रहेगा जिससे अपराध भी कम होंगे और लोगों के अंदर आत्म भी बढ़ जाएगा..

 

वहीं देखने वाली बात यह है कि एसीपी दिनेश शर्मा हमेशा से ही हर साल गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के समारोह को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं..

 देखें वीडियो - दिनेश शर्मा ने कैसे कमला मार्केट थाने में किया था समारोह

इससे पहले वह  रोहिणी में तैनात थे तो उन्होंने वहां भी इसी प्रकार का देश भक्ति का प्रोग्राम रखा था और जब वह कमला मार्केट थाने में थे तब भी उन्होंने इसी तरीके से गणतंत्र दिवस का समारोह रखा था जिसमें डीसीपी समेत एसीपी, एसएचओ समेत आसपास के क्षेत्र समेत दूर दूर से लोग भी उस समारोह में मौजूद रहे थे..

गौर करने वाली बात यह है की जैसे ही गणतंत्र दिवस का समारोह खत्म होता है उसके बाद ही दिनेश शर्मा अपने सभी साथियों का मनोबल बढ़ाने के लिए और एक पॉजिटिव वाइब्स देने के लिए यह प्रोग्राम करते हैं साथ ही साथ थाने को इस तरीके से सजाया जाता है कि मानो यह लगे हिना कि यह कोई था ना है या कोई घर...

 

देखें वीडियो - एसीपी दिनेश शर्मा ने कैसे मनाया था करोल बाग थाने में समारोह

नौगावां सादात: एक बार फिर थाना नौगावां सादात क्षेत्र में NIA टीम ने छापामारी की! पिछले दिनों नौगावां सादात थाना क्षेत्र के ग्राम सैदपुर इम्मा में NIA टीम ने छापेमारी की थी तथा सईद व उसके भाई को गिरफ्तार किया था एवं कई अन्य लोगो को NIA मुख्यालय दिल्ली में हाज़िर होने का नोटिस भी दिया था!

दिल्ली(जावेद अब्बास)- मणिपुर के एक पत्रकार को सोशल मीडिया पर कथिततौर पर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने को लेकर कस्टडी में लिए जाने के करीब एक महीने बाद मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत उसे एक साल तक हिरासत में रखने की सजा सुनाई गई।

दिल्ली -11 दिसंबर को 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के रिज़ल्ट का इतज़ार हर कोई कर रहा था लेकिन राजस्थान और एमपी के रिज़ल्ट के लिए तकरीबन 24 घंटे लग गए और 12 दिसंबर की सुबह तक पूरी स्तिथि साफ हो गई और बीजेपी के हाथ सिर्फ हार ही लगी.. खबर सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने एमपी और राजस्थान में कई दूसरे विधायकों से भी बात की लेकिन बीजेपी उनका साथ पाने में कामयाब ना हो सकी और अब ये तीनों बड़े राज्यों की कमान कांग्रेस के हाथ लग गई है.. जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सर और उंचा हो गया है...

 

हालांकि बीजेपी के हारने की कई वजह बताई जा रही है. वरिष्ठ पत्रकार परेश सिंह और अली अब्बास नकवी ने इन वजहों के बारे में विश्लेषण किया.. आईए आपको बताते हैं कि क्या मुख्य वजह रही जिससे बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा..

 

बीजेपी के हारने के कारण हैं -

1. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के 2 बयान ने हिन्दू वोट भी कटवा दिए

बजरंग बली हमारे - कांग्रेस अली तुम्हारे - जी हां योगी अदित्यनाथ ने पहले ये बयान दिया कि कांग्रेस अली को लेले हम बजरंग बली को ले लेंगे, जिसके बाद योगी अदित्यनाथ मुस्लिम समाज के गुस्से का भी शिकार हुए.. आपको बता दें जिस वक्त योगी सीएम बने थे..

उसके कुछ वक्त बात ही 13 रजब(इस्लामिक कैलेंडर) के दिन हज़रत अली अस के जन्मदिन का दिन था जिसकी मुबारक बाद खुद सीएम योगी अदित्यनाथ ने ट्वीटर के माध्यम से दी थी और उस वक्त मुस्लिम समाज ने योगी अदित्यनाथ का स्वागत भी किया था.. लेकिन अब उनके इस बयान से काफी मुस्लिम समाज नाराज़ रहा

और दूसरा

 

 

"बजरंग बली की जाति दलित है" - योगी अदित्यनाथ ने बजरंग बली को तो अपना कह दिया था लेकिन यहां बजरंग बली भी उन्हें नहीं मिल सके.. एक चुनावी सभा में योगी आदित्यनाथ ने बजरंग बली ही कि जाति बता दी जिसके बाद पिछड़ी जाती समेत कई हिंदू उनके इस बयान से कट गये..जिसके बाद पिछड़ी जाती के लोगों ने कई हनुमान के मंदिर पर कब्ज़ा तक किया..

 

2. एससी एसटी एक्ट बिल - सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए कहा था कि इसके मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी, लेकिन केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर इसे पलट दिया. एमपी में तो जगह-जगह इसके खिलाफ प्रदर्शन भी हुआ जो काफी हिंसक रूप ले गया. हालत इस कदर बदतर हो गई कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर चप्पल फेंकी गई. जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान उनके ऊपर पत्थर फेंके गए थे और काले झंडे दिखाए गए थे. चप्पल फेंकने वाले एससी/एसटी एक्ट का विरोध कर रहे थे. यह घटना मध्य प्रदेश के सीधी जिले की थी.

 

3. किसान का गुस्सा - बीजेपी ने किसानों के लिए कर्ज़ माफी से लेकर उनको अच्छी रकम में माल बेंचने तक की बातें की थी लेकिन किसान अब भी मजबूर है और उसी का असर अब देखने को मिला. वहीं दिल्ली में हुई किसान रैली ने और बीजेपी को किसानों से दूर कर दिया..किसानों का गुस्सा ही था जो बीजेपी को छत्तीसगढ़, राजस्थान मध्य प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा -

 

4. बीजेपी के अब जुमलों पर यकीन नहीं 

    15 लाख रुपए नहीं आये अकाउंट में -  2014 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि इतना पैसा बाहर से आएगा कि हर एक के अकाउंट में 15 - 15 लाख रुपये आ जाएंगे.. जिसके बाद जब बीजेपी जीत गई तो एक टीवी कार्यक्रम में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वो सिर्फ एक चुनावी जुमला था.. जिसके बाद कांग्रेस ने इस जुमले को भी खुब भुनाया.. यह भी एक मुख्य कारण है कि युवा भी बीजेपी से दूरी बनाने लगा है.. क्योंकि रोज़गार भी अब उन्हें नहीं मिल रहा है..

 

5. विदेशों में जमा काला धन अभी तक नहीं आया वापस - कांग्रेस के वक्त में अन्ना आंदोलन में भाग लेने वाले बाबा रामदेव, किरण बेदी समेत कई दिग्गज नेता काला धन वापस लाने की मांग कर रहे थे..जिसका पूरा सहयोग बीजेपी दे रही थी और इसी चीज़ को मुद्दा बना कर बीजेपी ने वादा किया था कि उनकी सरकार वापस आएगी तो ज़रुर काला धन वापस लाया जाएगा.. लेकिन अभी तक काला धन वापस नहीं आ पाया..

6. करणी सेना का राजस्थान में जमकर विरोध प्रदर्शन

पद्मावत फिल्म के रिलीज़ होने से पहले ही पूरे देश में बवाल मचा हुआ था तभी करणी सेना ने ये कह दिया था कि अगर .ये मूवी रिलीज़ हुई तो बीजेपी को सत्ता से हटा देंगे.. जिसके बाद इस चुनाव में भी करणी सेना ने राजस्थान में अपना विरोध दिखाते हुए कांग्रेस को समर्थन कर दिया और उसके वोट वहां से कट गए.

.

7. राजस्थान में नहीं दिखा लोगों को विकास, सरकार और संगठन में था बीच मे टकराव

वसुंधरा राजे के राज में वहां की जनता परेशान सी होने लगी थी. कभी फिल्म को लेकर बवाल होता था.. तो कभी कोई ना कोई बात पर.. साथ ही वहां रोज़गार, पानी बिजली की भी समस्यां से जनता जुझ रही थी.. वहीं खबरों के मुताबिक सरकार और सगंठन के बीच में टकराव भी देखने को मिल रहा था.. जिसका खामियाज़ा बीजेपी को राजस्थान में उठाना पडड़ा..

 

8.*वसुंधरा राजे से थे सभी नाराज़, उनका रवैया नहीं आया पसंद, तानाशाही का लगा था आरोप

बीजेपी के कार्यकर्ताओं का ही आरोप था कि उनकी सीएम उनकी बात नहीं मानती है. एक ये कारण भी था कि खुद बीजेपी कार्यकर्ता अपनी सीएम से नाराज़ थे.. और जब दूसरे लोग बीजेपी नेताओं के पास काम लेकर आते थे तो वो काम भी पूरा नही हो पाता था.. 

 

9. एमपी और छत्तीसगढ़ में 15 साल से एक ही सरकार थी जनता परिवर्तन चाह रही थी - 

एक कारण ये भी हो सकता है कि एमपी और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से बीजेपी के ही मुख्यमंत्री हैं और केंद्र सरकार में भी बीजेपी की ही सरकार है.. इसी लिए जनता अपना मन भी बना चुकी होगी कि उन्हें इस बार अपने सीएम को बदलना है..

 

10. कांग्रेस राफेल मामले में जनता को समझाने और शक दिलाने में कामयाब रही कि चौकीदार चोर है

राफेल डील के मामले को भूनाने में कांग्रेस बिल्कुल कामयाब हो गई.. उसने आम जनता के दिल में शक ज़रुर डाल दिया है कि राफेल डील में ज़रुर कुछ घोटाला हुआ है..और बीजेपी इस शक को दूर भी कर नहीं पाई.. जिसकी वजह से आम जनता को बीजेपी से दूरी बनानी पड़ी...

 

11.नोटबन्दी भी एक बड़ी वजह

नोटबंदी से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था.. एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान के कई ऐसे एरिया थे जहां लोगों को कैश की किल्लत का महीनों सामना करना पड़ा था..तो ये भी बड़ा कारण है कि अभी आम जनता नोटबंदी के दर्द को भूला नहीं पाई..

12. ट्रिपल तलाक पर जब बिल ला सकती थी तो राम मंदिर पर क्यों नहीं कुछ किया

ट्रिपल तलाक पर बीजेपी बिल लाई थी इसी बात को लेकर आम जनता बीजेपी से नाराज़ है कि जब तीन तलाक पर बिल ला सकते हैं तो राम मंदिर पर बिल क्यों नहीं लेकर सरकार आ रही..

 

13. देश भर में मोब लिंचिंग समेत हिंदुत्व को बढ़ावा देने से जनता भी नाराज़, लोगों को सॉफ्ट हिन्दू ही बनना पसंद जो सभी धर्म की इज़्ज़त करें

देश में हो रही मॉब लिंचिंग, गौ हत्या के नाम पर मारपीट आदि ने भी देश के अंदर अशांति का माहौल पैदा कर दिया था जिसकी वजह से गांव दराज के लोग काफी सहमे भी हुए थे..और बीजेपी सरकार से दूरी बनाने लगे थे..लोगों को सॉफ्ट हिंदू पसंद हैं कट्टरवाद नहींं.

14. विपक्ष मज़बूत रहा और जिसका असर काफी दिखा, कारोबारी, आम जनता, पेट्रोल डीजल के दाम समेत कई मुद्दे से बीजेपी की कमर टूटी और लोग बीजेपी से खफा रहें

देश में महंगाई ने अपनी सीमा पार कर  रही है.. डीजल पेट्रोल के दाम भी आसमान छूं रहे थे. जिससे आम जनता काफी परेशान हो चुकी थी.. साथ ही पूरा विपक्ष भी एक साथ जुट गया जिससे बीजेपी के सामने काफी परेशानी खड़ी हो गई..और उसके हाथ से ये तीन बड़े राज्य निकल गए..

 

नई दिल्ली: नीरव मोदी-पीएनबी घोटाला उजागर होने से आठ महीने पहले ही इनकम टैक्स जांच रिपोर्ट में मोदी द्वारा बोगस खरीद, शेयरों का भारी मूल्यांकन, रिश्तेदारों को संदिग्ध भुगतान, संदिग्ध ऋण जैसे कई मामले उठाए गए थे. हालांकि इस बेहद जरूरी रिपोर्ट को अन्य एजेंसिंयों के साथ साझा नहीं किया गया.

नौगावां सादात: दो तीन सालों से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला एक मुस्लिम मौलवी भारतीय मीडिया में छाया हुआ है। अपने आपको इमाम कहने वाला मुहम्मद तौहीदी ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से इस्लामोफोबिया(इस्लाम का डर) फैलाने के लिए काफी मशहूर है।

ईरानी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने स्वीडन में यमनी पक्षों के मध्य होने वाली आरंभिक सहमति का स्वागत किया है।

भारत, ईरान के साथ आर्थिक सहयोग जारी रखेगाः अजीत डोभाल

 

तेहरान -ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ईरान और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग में विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया है।

 

तेहरान में दोनों पक्षों के बीच होने वाली इस मुलाक़ात में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमख़ानी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा के अतिरिक्त राजनैतिक, आर्थिक, व्यापारिक और ट्राज़िट के क्षेत्रों में सहयोग में अधिक विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया।

 

उन्होंने ईरान और भारत के संबंधों में विस्तार दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाओं की प्रभावी भूमिका की ओर संकेत करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को अधिक से अधिक विस्तृत किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमख़ानी ने कुछ देशों के विरुद्ध अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंधों को अत्याचारपूर्ण बताया। इस मुलाक़ात में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी जो तेहरान सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरान के दौरे पर हैं, इस सम्मेलन के आयोजन और ईरान की मेज़बानी की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच वार्ता प्रक्रिया के जारी रहने और द्विपक्षीय समझौतों को आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

उन्होंने कहा कि भारत, आर्थिक क्षेत्र में ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा और उनका देश ईरान में पूंजीनिवेश में रुचि रखता है

ब्यूरो रिपोर्ट- ईद ए ग़दीर की हर जगह बहुत बहुत मुबारक दी जा रही है लेकिन आखिर ईद ए ग़दीर है क्या? आइये अब ज़रा बताते हैं आखिर है क्या ये सबसे बड़ी ईद.

 

मन कुनतो मौला फा आज़ा अलीयुन मौला

 

जिस जिस का मैं मौला उस उस का अली (अ.स.) मौला

 

पैगम्बर मोहम्मद (स.अ.व.स.) जिस वक्त हज करके वापस लौट रहे थे तो उस वक्त रास्ते में एक जगह पड़ती है जिसका नाम था खुम (जिसे अब अल जोहफा के नाम से जाना जाता है)...वहां एक लाख से ज़्यादा सहाबा के बीच नबी (स.अ) ने खुदा के हुकुम से हज़रत अली अ.स. (जो उनके चाचा ज़ात भाई और दामाद भी थे) को अपना जानाशीन बताया...

 

उन्होंने(स.अ) कहा था कि अली (अ,स.) का दोस्त मेरा दोस्त है..और जो इनसे दुश्मनी करेगा वो मुझसे दुश्मनी करेगा..और जिसने मुझसे दुश्मनी की यानि उसने खुदा से दुश्मनी रखी...

 आखिर क्यों है ईरान में इतनी बरकत, किस के सदके में जीतता है ईरान - देखिये वीडियो

ये पूरा वाक्या 18 ज़िल्हिज्जा को हुआ था..जिसके बाद से सभी वहां मौजूद लोगों ने ह. अली (अ.स.) को मुबारक बाद दी..इसमें खुद सहाबी हज़रत उमर, उस्मान भी मौजूद थे, जिन्होंने भी हज़रत अली अस को मुबारकबाद दी.

 

तो इसलिए आज 18 ज़िलहिज्जा है जो इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक साल का आखिरी महीना होता है...तो अब इसलिए अपने नबी (स.व.स.) की कही गई बात को मानते हुए सभी  ईद ए ग़दीर की मुबारक बाद पेश करते हैं..क्योंकि  नबी (स.अ.) की क़ौल खुदा की बात होती है...और 

हज़रत अली अस की विलायत के ऐलान के बाद ही ख़ुदा ने कहा कि अब दीन मुकम्मल हुआ।

 क्या क्या करते हैं इस ईद में

देखा जाए तो इस्लाम दीन ही पूरा न होता अगर ये दिन न होता क्योंकि इसी दिन इस्लाम मुकम्मल हुआ था इस हिसाब से मुसलमान के लिए सबसे बड़ी ईद आज यानी ईद ए ग़दीर है. इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, ग़ुस्ल करते हैं,खुशबू लगाते हैं अपने बच्चों, समेत दूसरे लोगों को ईदी देते हैं, साथ ही इस दिन ज़ोहर की नमाज़ से पहले आमाल भी होते हैं और नमाज़ भी। इस दिन मुस्लिम रोज़ा भी रखते है.और खुशियां मनाते हैं.

 

एक बार फिर से ईद ए ग़दीर बहुत बहुत मुबारक हो आप सभी को.

 

#ईद_ए_ग़दीर

#Eid_e_Ghadeer

दिल्ली - केरल में बाढ़ की वजह से तकरीबन 325 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग बेघर हो गए है। ऐसे में ईरान के दिल्ली में कल्चर हाउस और एम्बेसी ने केरल के लोगों की मदद करने के लिए ईरान सरकार और IKRF के ज़रिए पैसे यहां भेजने के लिए प्रपोजल भेजा है। ईरान जहां जहां लोग आपदा, युद्ध, या परेशानी की वजह से परेशान होते हैं तो वहां ईरान इंसानियत का पैगाम देकर उन लोगों की मदद करता है। 
 
आयतुल्लाह खामनेई के नुमाइंदे और डिप्टी एम्बेसडर ने प्रपोज़ल भेजा
ईरान कल्चरल हाउस दिल्ली में शुक्रवार शाम आयतुल्लाह खामनेई केेे भारत में नुमाइंदे आयतुल्लाह आगा मेहंदीपुर और ईरान एंबेसी के डिप्टी एंबेसडर मसूद रिज़वानी  
प्रेस से मुखातिब हुए। केरल बाढ़ के सवाल पर जब पूछा गया कि जैसे इमाम खुमैनी रिलीफ फंड दुनिया भर में मज़लूम लोगों की मदद करता है तो क्या इंडिया में भी केरल के अंदर बाढ़ से परेशान लोगों की मदद करेगा तो दोनों अधिकारियों ने कहा कि हम ज़रूर मदद करने के लिए आगे बढ़ेंगे। ईरान पर इतने सेंक्शन लगे हुए है लेकिन फिर भी इंसानियत को देखते हुए ईरान मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। ईरान सरकार और इमाम खुमैनी रिलीफ फंड को इसका प्रोपोजल भेजा जाएगा।
 
आईएस को खत्म करने वाला ईरान, इसीलिए अमेरिका लगा रहा है प्रतिबंध -आग़ा मेंहदीपुर
आयतुल्लाह आग़ा मेहंदीपुर ने कहां की सीरिया और इराक से ISIS का खात्मा ईरान ने किया था जिसकी वजह से अमेरिका की सभी मंसूबों पर पानी फिर गया था और इसी वजह से अब अमेरिका इरान पर प्रतिबंध लगा रहा है लेकिन इरान हमेशा आतंकवाद के खिलाफ खड़ा रहेगा चाहे वह कहीं पर भी हो हम सीरिया इराक यमन, फिलिस्तीन समेत विश्व के सभी मजलूम लोगों के साथ खड़े हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह था की अमेरिका के जरिए हमारी 8 साल तक इराक से जंग चली लेकिन उस वक्त भी हमने बोस्निया जैसे देश को मदद की फिलिस्तीन के लोगों के साथ ईरान खड़ा हुआ है। 
 
"ईरान के खिलाफ हो रही हैं साजिश"
आगा मेहंदीपुर ने कहा कि ईरान पर इतने प्रतिबंध लगने के बाद भी इरान तरक्की करता गया वहीं ईरान के सिवा अगर कोई और देश होता तो वह 2 से 3 महीने में ही उन लोगों के सामने घुटने टेक देता लेकिन इरान की जनता अब अपने पैरों पर खड़ा होना सीख गई है और आयतुल्लाह खुमैनी के इन्किलाब के बाद हमने अपनी ताकत बड़ा ली है। ईरान ने न्युक्लियर परमाणु डील से लेकर हर एक डील को बखूबी निभाया है और उसे नहीं तोड़ा जिस की वजह से अब अमेरिका नए तरीके से ईरान के ऊपर प्रतिबंध लगाने की योजनाएं बना रहा है।
ईरान से साजिश के लिए सऊदी को सामने लाया गया है जिसका नक्शा इसरायल के पास है, इज़रायल कहता है कि उसके जासूस ईरान में हैं और वो हर चीज़ पर नज़र रखता है इसीलिए नक्शा इज़रायल बना रहा है वहीं इस सब की कमान अमेरिका के हाथों में हैं।
 
ईरान अब 40 साल पुराना वाला नहीं - आग़ा मेंहदीपुर
आयतुल्लाह खामनेई के भारत मे नुमांइदे आयतुल्लाह आग़ा मेंहदीपुर ने कहा कि दुश्मन देश जान लें कि अब ईरान 40 साल पुरानी ताकत वाला देश नहीं अब ईरान की ताकत कई गुणा बढ़ गयी है। बड़ी फौज के साथ साथ इंफ्रास्ट्रक्चर समेत हर ताकत ईरान में बढ़ गयी है। ईरान में 2 करोड़ बसीजी हर वक़्त देश के लिए तैयार रहते हैं। वहीं अमेरिका भी अब उतना ताकतवर नहीं है जितना वो पहले था। 

 
तेहरान- हज़रत मोहम्मद साहब ने 18 ज़िल्हिज्जा को अरब- गैर अरब के तकरीबन 1 लाख से ज़्यादा लोगों को ग़दीर के मैदान में कहा था कि मैं तुम्हारा आखिरी नबी सव हूँ और मेरे बाद तुम्हारे पहले इमाम अली अस होंगे और इन्ही की 11 औलाद क़यामत तक तुम्हारे साथ रहेंगी।
हज़रत अली अस का नजफ़ इराक में रोज़ा है, दूसरे इमाम हसन अस सऊदी तो इमाम हुसैन अस कर्बला में शहीद हुए। इसी तरह हर इमाम अलग अलग जगह शहीद हुए।
 
लेकिन सिर्फ एक ही इमाम हैं जो ईरान की सरजमीं पर शहीद हुए और वो हैं आठवें इमाम अली रज़ा अस। जी हां या ये कहूँ इनके पैरों के सदके में ही पूरे ईरान में बरकत, खुशहाली और इंसानियत की राह दिखती है। एक भिखारी आपको ईरान में नहीं दिख सकता और न ही कोई आपसे कोई चंदा, ढोंग आदि करता नजर आएगा। 
 
वहीं उनका दस्तरखान इतना बड़ा बिछता है कि सुबह से रात तक 15 हज़ार लोग हर रोज़ पेट भर खाना खा कर जाते हैं।
 
 
 
आइये अब ज़रा इमाम अली रज़ा अस की ज़िंदगी के बारे में बताते हैं आपको
 
आपका नाम अली और लक़ब रज़ा, साबिर, ज़की और वली थाl 11 ज़ीक़ादा सन 148 हिजरी में आपकी विलादत हुई और 23 ज़ीक़ादा या सफ़र की आख़िरी तारीख़ को सन 203 हिजरी में शहादत हुई, आपकी उम्र 55 साल थी।
छठे इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. की शहादत भी उसी 148 हिजरी में 15 या 25 शववाल को हुई यानी इमाम रज़ा अ.स. की विलादत से 15 या 25 दिन पहले हुई, इसीलिए आप फ़रमाया करते थे कि काश मैं अपने बेटे को देख लेता जो आलिमे आले मोहम्मद होग।
ज़ाहिर है कि इस्लामी जगत के सबसे बड़े उस्ताद और चार हज़ार ज़बर्दस्त आलिमों के उस्ताद की तरफ़ से ऐसी उपलब्धि हासिल करना बहुत बड़ी फज़ीलत है जिससे अंदाज़ा होता है कि सात नस्लें गुज़र जाने के बाद भी अली अ.स. के कमाल और उपलब्धियों में फ़र्क़ नहीं आया है, पहला अली इल्म के शहर का दरवाज़ा था तो यह अली भी आलिमे आले मोहम्मद है।
 
 
आपके दौर का हाकिम और ख़ुद को मुसलमानों का ख़लीफ़ा कहने वाला भी आपको ज़मीन पर सबसे बड़ा आलिम कहता था और या सय्येदी कह कर पुकारता था, सन 200 हिजरी में जब उसने आपके उत्तराधिकारी होने का ऐलान किया तो इन शब्दों में किया था कि अली इब्ने मूसा (अ.स.) अफ़ज़ल, आलम और तक़वा वाले हैं इसलिए वह इस पद के ज़्यादा हक़दार हैं और इसी बात पर 33 हज़ार के मजमे के बीच आपकी बैअत का अहद लिया गया था।
इससे पहले आपका इल्म और फ़ज़्ल कुछ ऐसा था कि जब आप नेशापूर से गुज़रे तो 24 हज़ार इल्मे हदीस के माहिर क़लम और दवात लेकर जमा हो गए कि आपसे हदीस नक़्ल करेंगे और आपने एक ख़ास इस्मत के सिलसिले के हवाले से इस हदीस को बयान किया था कि ला इलाहा इल्लल्लाह मेरा क़िला है जो इसमें आ गया वह मेरे अज़ाब से बच गया, इस हदीस के सिलसिले को देख कर इमाम अहमद इब्ने हमबल ने कहा था कि यह सिलसिला अगर किसी पागल और दीवाने पर पढ़ कर दम कर दिया जाए तो उसका पागलपन दूर हो जाएगा।
 
साजिश के तहत शहीद किया इमाम को
हारून रशीद की दो बीवियां थीं एक अरब की थी जिससे अमीन पैदा हुआ और एक कनीज़ जिससे मामून पैदा हुआ, दोनों के बीच बाप के ही ज़माने से सत्ता को लेकर खींचातानी शुरू हो गई थी और एक के साथ अरब वाले हो गए एक के साथ अजम (अरब के अलावा लोग) हो गए जिसकी वजह से हारून ने सत्ता को दो हिस्सों में बांट दिया और दोनों को एक एक हिस्सा दे दिया, लेकिन इसके बाद दोनों भाईयों में जंग हुई और मामून ने जंग जीत ली लेकिन अरबवासियों में विद्रोह शुरू हो गया जिसको दबाने के लिए मामून ने नई चाल चली कि इमाम रज़ा अ.स. को उत्तराधिकारी या बादशाह बना दिया जाए, इसलिए आपको मदीने से बुला कर आपके सामने हुकूमत पेश की, आपने फ़रमाया कि अगर तेरी हुकूमत अल्लाह की ओर से है तो तुझे किसी दूसरे को देने का हक़ नहीं और अगर जनता ने तुझे सत्ता पर बिठाया तो तुझे हुकूमत लेने का हक़ नहीं।
मामून ने मजबूर हो कर उत्तराधिकारी बनने की पेशकश की और दबाव डाला कि यह पद आपको क़ुबूल करना ही होगा वरना आपकी ज़िंदगी ख़तरे में पड़ जाएगी जिसके कारण इमाम अ.स. ने इस पद को इस शर्त पर क़ुबूल किया कि आप हुकूमत के मामलात में दख़लअंदाज़ी नहीं करेंगे।
सात रमज़ान सन 201 हिजरी को मजबूर हो कर उत्तराधिकारी बनने को क़ुबूल किया और एक शव्वाल को मामून ने ईद की नमाज़ पढ़ाने के लिए कहा, जिसके बाद इमाम अ.स. पूरी इमामत की शान के साथ नमाज़ पढ़ाने निकले पूरी फ़ेज़ा तकबीर के नारों से गूंज रही थी, यह सब देख कर मामून ने आपको वापस बुला लिया कि कहीं हुकूमत हाथ से न निकल जाए। 
हर इंसान इमाम को चाहता था और इमाम के साथ लब्बेक कहने लगा जिसे देखकर मामून ने साजिश के तहत इमाम को ज़हर दे दिया और आखिरी में आपकी शहादत हो जाती है। 
 
3 करोड़ लोग आते हैं हर साल 
 
जहां आपको ज़हर दिया गया उस जगह को अब मशहद कहते हैं और वहीं इमाम अली रज़ा अस का रौज़ा भी है। इमाम के रौज़े की ज़्यारत करने के लिए तकरीबन 3 करोड़ से ज़्यादा लोग हर साल पूरी दुनिया से यहां आते हैं। कई एकड़ में इमाम अली रज़ा अस का रौज़ा है। जहाँ पर एक मिनट भी ऐसा नही जाता जब रौज़ा खाली हो। हर वक़्त रौज़ा भरा ही रहता है चाहे दिन हो या रात या पूरे साल। 
 
                    इमाम अली रज़ा अस के दस्तरखान पर खाना खाते हुए ज़ायरीन
 
इमाम रज़ा अस का दस्तरखान, एक निवाले के लिए तरसते हैं लोग
इमाम अली रज़ा अस ने अपनी ज़िंदगी में ही अपने नाना रसूल ए ख़ुदा स व अ की सुन्नत पर चलकर, अपने जद हज़रत अली अस, इमाम हसन अस समेत हर सभी इमाम जैसे ही खुद भी दस्तरखान लगवाते थे जिसमें हर धर्म, हर कोई व्यक्ति आकर खाना खा सकता था। और अब भी इमाम अस के पैरों पर चलते हुए तकरीबन 40 साल से ज़्यादा का वक्त हो गया है यानी जबसे आयतुल्लाह रूहुल्लाह खुमैनी साहब ने ईरान को आज़ादी दिलाई थी तबसे हर दिन यहां तकरीबन 15 हज़ार से ज़्यादा लोग खाना खाते हैं। और खाना भी ऐसा की किसी फाइव स्टार होटल तक मे ऐसा खाना नसीब न हो। इतिहासकार कहते हैं कि खुद गुरु नानक साहब भी मशहद शहर में रहे थे और उन्होंने यहां पर ये दसतरखान लगते हुए देखा था जिसके बाद उन्होंने ने भी हिंदुस्तान में भी लंगर के नाम से खाना खिलाना शुरु किया। साथ ही गरीब नवाज़ साहब ने भी इमाम से ही सिखा था।
 
 
इमाम अली रज़ा अस की औलादों को ही कहते हैं रिज़वी
 
आपके उत्तराधिकारी बनते ही पूरे इस्लामी जगत में आप मशहूर हो गए आपके बाद के इमामों को इब्ने रज़ा के नाम से याद किया जाने लगा बल्कि आपकी औलाद को रिज़वी सादात में शुमार किया जाने लगा, क्योंकि आपकी औलाद में लड़कों में इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. के अलावा कोई और नहीं था इसलिए आपकी औलाद तक़वी या जवादी कही जाने लगी