कोरोना की रोकथाम में चीन के कौन से क़दम प्रभावी रहे, अन्य देशों के लिए क्या हैं सबक़?

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अमरीकी थिंक टैंक फ़ारेन अफ़ेयर्ज़ काउंसिल की पत्रिका फ़ारेन अफ़ेयर्ज़ ने एक रिपोर्ट में यह समीक्षा की है कि दुनिया में कोरोना से किस तरह संघर्ष किया जा रहा है और चीन ने इस घातक वायरस को कंट्रोल करने के लिए क्या क़दम उठाए।

 

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय भी कोरोना से संक्रमित लोगों में 92 प्रतिशत का संबंध चीन से है जबकि इस वायरस से मरने वाले 3 हज़ार लोगों में 118 को छोड़कर सबका संबंध चीन से है।

हालिया कुछ दिनों में जो हालात सामने रहे उन्हें देखकर यह कहा जा सकता है कि कोविड-19 का मुद्दा अब कुछ ही दिन चीन का प्रमुख मुद्दा रहेगा क्योंकि चीन में इस वायरस पर तेज़ी से कंट्रोल हो रहा है।

अब पहली बार यह देखने में आ रहा है कि एक दिन में कोरोना से संक्रमित नए मामले चीन में कम और चीन से बाहर ज़्यादा हैं। ब्राज़ील, अफ़ग़ानिस्तान और बहरैन तथा फ़ार्स खाड़ी के तटवर्ती देशों में यह वायरस फैला है। इनमें से किसी भी देश में कोरोना से संक्रमित व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से चीन से नहीं आया है। यह वायरस अब दुनिया के 60 से अधिक देशों तक फैल चुका है।

अमरीका में इस वायरस से मरने वालों की संख्या 9 तक पहुंच गई है। ईरान में यह संख्या 70 से अधिक है।

जापान, दक्षिणी कोरिया और इटली की हालत बहुत ख़राब है। कोरोना वायरस के मामले में दुनिया की सरकारों को यह देखना है कि चीन के अनुभव का कौन सा भाग वह अपने यहां इस्तेमाल कर सकती हैं।

चीन में यह देखने में आया कि कोरोना से ग्रस्त होने वाला व्यक्ति एक सप्ताह के भीतर फेफड़ों की गंभीर तकलीफ़ का सामना करने पर मजबूर था। क्या यही स्थिति अन्य देशों में भी हो सकती है?

चीन की आधी आबादी सिगरेट पीती है और सिगरेट पीने वालों के बारे में यह देखा गया है कि दूसरे इनफ़्लुएंज़ा का प्रभाव भी उनपर अधिक गहरा होता है। चीन में कोरोना से मरने वालों की अधिक संख्या का एक कारण सिगरेट नोशी भी हो सकती है।

फ़ारेन अफ़ेयर्ज़ का कहना है कि चीन में शहरी जीवन का रिवाज बहुत ज़्यादा हो गया है और चीन के शहरों में काफ़ी प्रदूषण रहता है जबकि इस देश की आबादी भी ज़्यादा है और भीड़भाड़ हर जगह रहती है जिससे वायरस फैलने की संभावना बढ़ जाती है। चीनियों का यह अनुभव है कि यह वायरस बूढ़े लोगों में ज़्यादा आसानी से फैलता है और 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को बहुत बुरी तरह जकड़ लेता है। चीन में सन 2000 के बाद 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की दर बढ़ी है।

दुनिया के देशों के लिए यह भी देखने वाली बात है कि इस वायरस का देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। चीन के हूबी प्रांत का पूरा चिकित्सा विभाग इसी वायरस से लड़ने में व्यस्त हो गया। हूबी प्रांत का केन्द्र वूहान शहर है जहां से यह वायरस फैला है। रिपोर्टें बताती हैं कि डाक्टर और नर्सें यहां तक कि स्वयंसेवी नर्सें दिन रात सेवा में व्यस्त रहीं जबकि उनके पास पर्याप्त मात्रा में मास्क और अन्य ज़रूरी चीज़ें भी नहीं हैं। दूसरी ओर बीमारों का कहना है कि उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यानी संक्रमित लोगों की संख्या इतनी ज़्यादा थी कि डाक्टरों और नर्सों की संख्या बहुत कम पड़ गई।

चीन ने इसके अलावा जो महत्वपूर्ण क़दम उठाए उनमें एक यह भी था कि उसने 76 करोड़ लोगों की आवाजाही को सीमित कर दिया, परिवहन को कंट्रोल किया, किसी भी स्थान पर लोगों के एकत्रित होने पर रोक लगाई और इन चीज़ों ने वायरस के प्रसार को रोकने में बड़ी मदद की।साभार- pars today

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