इतिहास में पहली बार मौला अली की शहादत पर नहीं उठेगा ताबूत

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अमरोहा: मौला ए कायनात हजरत अली का शहादत दिवस 21 रमजान को मनाया जाता है। इस मौके पर जनपद अमरोहा के क़स्बा नौगावां सादात में भी कई सो वर्षों से मौला अली की याद में जुलूस निकाला जाता है ताबूत उठाए जाते है, मजलिसें होती हैं।

पर कोरोना वायरस और लाक डाउन के चलते यह सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए है। यहाँ के इतिहास में यह पहला मौका है जब हजरत अली के शहादत दिवस पर जुलूस नहींं निकलेगा। शिया मुसलमान हजरत अली का शहादत दिवस बड़ी ही शिद्दत के साथ मनाते आ रहे है। 19 रमजान से ही मजलिसों का दौर शुरु हो जाता है। मजलिसों में बड़ी संख्या मे लोग जमा होते है और मौला अली को खिराज ए अकीदत पेश करते हुए उनकी शांन मे कसीदे व नोहे पढ़ते है। ईमामबाडो से ताबूत उठाए जाते है। लोग मातम करते हैं। 

यह सिलसिला 19 रमजान से 21 रमजान तक चलता है। लेकिन लाक डाउन के चलते इस बार न तो कोई मजलिस होगी और न कोई ताबूत उठेगा और न कोई जुलूस निकाला जाएगा। ताबूत उठाने वाली कमेटी ने पत्र जारी कर जानकारी दी कि हजरत अली का शहादत दिवस जैसे वह मनाते थे बैसे न मना पाने का गम हमेशा रहेगा। उन्होने कहा देश मुश्किल परिस्थितियों में है इसको देखते हुए मौला अली के शहादत दिवस पर निकलने वाले जुलूस, मजलिसों और ताबूत पर रोक लगा दी है। अब सभी अपने अपने घरों में रहकर मौला अली को याद करें।

इसी जगह हज़रत अली अस को नमाज़ पढ़ते वक्त मारी गयी थी ज़रबत, वीडियो देखकर कीजिए ज्यारत 

 

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