उत्तर प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के सात भत्ते खत्म किए

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उत्तर प्रदेश सरकार अपने इस कदम से कम से कम 1500 करोड़ रुपये सालाना बचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है. सरकार के इस कदम से नाराज प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संघों ने लॉकडाउन के बाद आंदोलन की चेतावनी दी है.

लखनऊ: कोरोना वायरस महामारी के बाद अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम करने के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले सात तरह के भत्तों को समाप्त करने का निर्णय लिया है.

पिछले महीने सरकार ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को मिलने वाले इन भत्तों को एक साल के लिए रोकने का फैसला किया था.

वित्त सचिव संजीव मित्तल की ओर से मंगलवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर राज्य सरकार के राजस्व में आई कमी के बाद उन भत्तों की समीक्षा की गई, जो केंद्र में या तो बंद कर दिए गए हैं या फिर नहीं हैं और राज्य सरकार में अनुमान्य हैं.

विभाग ने सचिवालय भत्ता, पुलिस के विभिन्न प्रकोष्ठों को मिलने वाला विशेष भत्ता, सभी विभागों में जूनियर इंजीनियरों को मिलने वाला विशेष भत्ता, लोक निर्माण विभाग में दिया जाने वाला अनुसंधान भत्ता, अर्दली भत्ता और डिजाइन भत्ता के साथ-साथ सिंचाई विभाग में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलने वाला अनुसंधान भत्ता तथा भविष्य निधि लेखों का रखरखाव करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले प्रोत्साहन भत्ते आदि को खत्म कर दिया है.

सरकार अपने इस कदम से कम से कम 1500 करोड़ रुपये सालाना बचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले महीने 31 मार्च, 2021 तक अपने 16 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी पर रोक लगाने का फैसला किया था.

हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि अन्य राज्यों के विपरीत यूपी सरकार ने अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती नहीं की है.

नवभारत टाइम्स के अनुसार, एक साल के लिए स्थगित सात भत्तों को हमेशा के लिए खत्म किए जाने के फैसले पर कर्मचारी नाराज हैं. वे लॉकडाउन के बाद आंदोलन की तैयारी में हैं.

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी और महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने कहा कि एक तरफ सांसदों के भत्तों में बढ़ोतरी की जा रही है और दूसरी तरफ कर्मचारियों के भत्ते खत्म किए जा रहे.

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहले कहा कि हम वेतन में कोई कटौती नहीं करेंगे. फिर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो फैसला लिया जाएगा, वह लेंगे. फिर केंद्र के फैसले के इतर भत्तों पर साल भर के लिए रोक लगाई और अब उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया. सरकार फैसला वापस ले अन्यथा इसके खिलाफ कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे ही.

उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने आंदोलन की घोषणा की है. सचिवालय संघ और सचिवालय समन्वय समिति ने भी राज्य सरकार के इस कदम की आलोचना की है.

सचिवालय समन्वय समिति एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद से मुलाकात भी की और विरोध स्वरूप एक ज्ञापन भी सौंपा.

कांग्रेस पार्टी की प्रदेश इकाई ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि कोरोना की आड़ में यह लिया गया गलत फैसला है. सरकार इस पर विचार करे.

(साभार: the wire)

 

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