चिंता: ब्रिटेन में डॉक्टरों के पास अपनी या मरीज़ की जान बचाने के बीच एक च्वाइस, भारत में ऐसा हुआ तो क्या होगा 

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ब्रिटेन में डॉक्टरों ने कोरोना वायरस के मरीज़ों के इलाज के लिए मेडिकल स्टाफ़ के पास प्रोटेक्टिव इक्विपमंट की कमी के अंजाम की ओर से सचेत किया है।

ब्रिटेन में ऐसे डॉक्टरों की तादाद बढ़ती जा रही है जो कोरोना वायरस के मरीज़ों का प्रोटेक्टिव किट पहने बिना इलाज करने पर मजबूर हैं। इसकी वजह इस किट की कमी है।

हाई रिस्क वाले हालात में काम करने वाले लगभग एक तिहाई डाक्टरों के पास लंबी आस्तीन वाले गाउन, या पूरे चेहरे को ढांकने वाले हेलमेट न होने की रिपोर्ट है। यह हालात पिछले तीन हफ़्तों में और ख़राब हुए हैं।

ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ़ फ़िज़िशियन्स ने बताया कि अस्पतालों में काम करने वालों में 40 फ़ीसद ऐसे लोग हैं जो आंखों की रक्षा करने वाले इक्विपमंट के बिना काम कर रहे हैं, जबकि साढ़े 15 फ़ीसद लोग ऐसे मास्क के बिना काम रहे हैं जो चेहरे की कोरोना वायरस के ड्रॉप्लेट्स से रक्षा करते हैं।

एक डॉक्टर ने कहाः डॉक्टरों के पास अपनी ज़िन्दगी की रक्षा या मरीज़ों की जान बचाने के बीच किसी एक को चुनने का डरावना विकल्प है।

आरसीपी या रॉयल कॉलेज ऑफ़ फ़िज़िशियन्स की ओर से कराए गए सर्वे का नतीजा ऐसी हालत में सामने आया है कि ब्रिटिश विदेश मंत्री डॉमेनिक राब ने इस बात को क़ुबूल किया है कि सरकार एक महीने पहले पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमंट पीपीई मुहैया करने के अपने वादे को पूरा करने में नाकाम रही है। ये वादा प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने किया था।

जब राब से, जो कार्यवाहक प्रधान मंत्री भी हैं, पूछा गया कि कब तक ज़रूरी किट की सप्लाई काफ़ी क्वान्टिटी में हो पाएगी, तो उन्होंने कहा कि जिस तरह की भरोसेमंद गारेंटी आप चाहते हैं, वह निश्चित तौर पर कह पाना बहुत मुश्किल है।

जब डॉमिनिक राब से कहा गया कि आप इस बात को मानें कि कुछ मेडिकल स्टाफ़ को मायूसी हुयी है तो उन्होंने कहाः हम पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमंट पीपीई की सप्लाई में वहां पर नहीं है जहां हम होना चाहते थे। (साभार: parstoday)

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