सिर्फ 3 जोड़ी कपड़ो के मालिक हैं,इराक़ के सबसे बड़े शिया नेता सिस्तानी, जिन्होंने ISIS के खिलाफ जिहाद करने का फतवा दिया और आतंकवाद की कमर तोड़ी। V.o.H News

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लेखक:  शहज़ाद आब्दी

इराक: आयतुल्ला अली सिस्तानी इराक़ में अभी शियाओं के  सबसे बड़े नेता हैं आयतुल्ला अली सिस्तानी इराक़ में शिया समुदाय के सबसे बड़े नेता हैं लेकिन उनके एक इशारे पर इराक का सुन्नी भी अपनी जान देने को तैयार दिखता है.

इराक़ में अभी पाँच वरिष्ठ आयतुल्ला हैं और सिस्तानी उनमें सबसे वरिष्ठ हैं. इराक़ में सद्दाम हुसैन की पिछली सरकार ने उनको बहुत यातनाये दी  थी. उन्हें लंबे समय तक नज़रबंद रहना पड़ा मगर कुल-मिलाकर वे राजनीति से दूर ही रहे. सद्दाम  हुसैन की सत्ता के गिरने के बाद से  शिया समुदाय में नेतृत्व की लड़ाई शुरू हो चुकी है. इस दौरान 1980 के दशक के समय के एक आयतुल्ला के बेटे की हत्या भी कर दी गई थी.अब्दुल माजिद अल खोइ लंदन में निर्वासन का जीवन बिता रहे थे और इराक़ लौटते ही छुरा घोंपकर उन्हें मार डाला गया था .सिस्तानी इराक़ में पुरानी पीढ़ी वाले रूढ़िवादी शिया नेताओं के प्रतिनिधि माने जाते हैं.अमरीकी गठबंधन से संबंध अमरीका सिस्तानी के प्रभाव को जानता है और उनके रूख़ की सराहना करता है सिस्तानी के प्रभाव को अमरीकी गठबंधन समझता है और इसीलिए उसने उनकी उदार नीतियों की सराहना की थी.सिस्तानी धर्म को शासन से अलग रखना चाहते हैं और राजनीतिक बयान देने से बचते रहे हैं.उन्होंने इसके पहले भी कई बार अपने समर्थकों से गठबंधन सेना के ख़िलाफ़ लड़ाई नहीं करने की अपील की है.मगर पिछले समय  में उन्होंने इराक़ के बारे में अमरीका की नीति की जमकर खिंचाई की थी.उन्होंने अमरीका की पहल पर इराक़ी शासकीय परिषद के बनाए जाने की योजनाको ठुकरा दिया.उन्होंने ये कहते हुए योजना का विरोध किया कि इराक़ के भविष्य को तय करने में इराक़ियों को समुचित भागीदारी नहीं दी जा रही.

 

महत्वपूर्ण भूमिका

अब आयतुल्ला सिस्तानी इराक़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं  जब पूरी दुनया आतंकवाद के प्रकोप से जूझ रही थी और isis इराक और सीरिया को तोड़कर अलग नाम से देश बनाने की घोषणा कर रहा था तभी आतंकवाद के प्रकोप को ख़त्म करने के लिए अयातुल्लाह सिस्तानी ने आतंकवाद के खिलाफ जिहाद करने का हुक्म दिया और आतंकवाद की कमर तोड़ दी जिसका नतीजा ये हुआ की आतंकी महिलाओ की पौशाक पहन कर भागने को मजबूर हुए और सेना ने फिरसे कमान संभाली। इतिहास जब लिखा जाएगा तो इन 84 साल के बूढ़े शख्स का नाम 2011-12 में तृतीय विश्व युद्ध को अपने दम पर रोकने वालों में लिखा जाएगा ।एक धीमी सी आवाज़ से दाएश (ISIS) के धमाकों की आवाज़ को दबा दिया जिसने । ये वो शख्स हैं जिनके नाम पर करोड़ों डॉलर,युआन,येन,रुपया,रियाल,यूरो इराक पहुंचते हैं  फिर वहां से दुनया भर के गरीबो को बाट दिए जाते हैं,  मगर सिर्फ 3 जोड़ी कपडे के ख़ुद मालिक हैं सिस्तानी । एक छोटे से मकान में ज़िन्दगी बसर करते हुए, गरीबी के आलम में अमरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी,मोसाद, ब्रिटिश मिनिस्ट्री ऑफ इंटेलिजेंस 6 के मंसूबे पर पानी फेर दिया था। 

 

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