Saturday, January 28, 2023
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अमन का शहर है नौगावां सादात: मंच मुस्लिमो का, मगर लीला है राम की- यहाँ राम लीला का मंच सजाते हैं मुस्लिम, पढ़िए पूरी कहानी….

नौगावां सादात । कहीं हिजाब पर चर्चा है, तो कही किसी फिल्म पर शोर है, कही रोड पर नमाज़ पढने पर रोष है, तो कावड़यो द्वारा तेज़ आवाज़ में डी जे बजाने पर नाराज़गी, कहीं कश्मीर के मुद्दे को लेकर मातम है देश में जगह जगह  सियासत ने  आग लगायी हुई है । ऐसे में रामलीला का भी नाम प्रशासन के कान खड़े कर देता है, लेकिन इन्हीं अफवाहों और हवाओं के बीच कहीं इसी रामलीला से सद्भाव की शीतल बयार भी बहती है।

शहर हो तो ऐसा-

उनका जो फर्ज है वो अहले सियासत जानें,

मेरा पैगाम मोहब्बत है, जहां तक पहुंचे।

देश में एक शहर ऐसा है जो आज भी इस शेर को सच साबित कर रहा है,  हम बात कर रहे है उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा के तहसील नौगावां सादात की यहाँ काफी पुराने समय से रामलीला का मंचन होता है। यहां के मुसलमान 40 साल से रामलीला का मंचन कर इबारत पर इबारत गढ़ रहे हैं।

इस राम लीला का पूरा खर्चा ज़्यादातर मुस्लमान ही उठाते हैं, चंदा देने से लेकर विजयादशमी तक कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। पूरी रामलीला प्रबंध कमेटी भी मुस्लिम ही चला रहे हैं।

नौगावां की मिटटी में इस कदर मुहब्बत घुली हुई है अगर आप यहाँ आकर कभी देखें तो आप ये कहने पर मजबूर हो जायेंगे कि कोई जलजला भी शायद इसे अलग न कर पाए। नौगावां सादात में  हिंदू-मुस्लिम एकता की यह मिसाल बीते लगभग 35/40  साल से चली आ रही है।

श्री धार्मिक रामलीला कमेटी का गठन लगभग 35/40 साल पहले हुआ तो स्व० अहसान अख्तर को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। 30 वर्ष तक उन्होंने रामलीला के आयोजन में भागीदारी निभाई। फिर लगभग दस साल पहले उनके भतीजे गुलाम अब्बास को अध्यक्ष बनाया गया। जिनके क्र कमलो द्वारा आज भी इस प्रथा का निर्वहन किया जा रहा है। इसके अलावा कस्बे के अन्य बहुत से मुस्लिम भाई रामलीला के आयोजन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

श्री रामलीला के कमेटी के सदस्य सुदेश कुमार  बताते हैं कि चंदा की शुरुआत भी मुस्लिम भाई करते हैं और रामलीला का उद्घाटन भी मुस्लिम भाइयों द्वारा कराया जाता है। कलाकार लाने से लेकर सभी प्रकार के प्रबंध मुस्लिमों के हाथ में ही रहते हैं।

समाजसेवी शहजाद आब्दी कहते हैं कि इससे समाज में अच्छा संदेश जाता है। इससे हम फिरकापरस्त ताकतों को इंसानियत और भाईचारे का अहसास कराते हैं। जाति-धर्म की दीवारों में बांटने वालों को हम कहीं टिकने नहीं देते, क्योंकि विजय दशमी में सिर्फ राम की ही नहीं, इंसानियत की भी जीत होती है।

श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष  गुलाम अब्बास उर्फ़ किट्टी ने बताया , रामलीला का आयोजन आगे भी इसी तरह कराया जाता रहेगा। भाईचारा बढाने के लिए हमलोग आजीवन प्रयासरत रहेंगे।

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