Saturday, November 26, 2022
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इराक़ में ”अहले बैत (अ)” के पवित्र रौज़ों को तोड़े जाने की अपील के बाद तनाव और विरोध प्रदर्शन

इराक़ में अल-सर्ख़िया संप्रदाय के एक धर्मगुरु अली मूसा आकूल काज़ेमी अल-मसूदी द्वारा शिया मुसलमानों के इमामों के पवित्र रौज़ों को ध्वस्त करने की अपील के बाद, विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है।

अल-फ़त्ह अल-मुबीन मस्जिद के इमाम अल-मसूदी ने सोमवार को इराक़ में स्थित अहले बैत (अ) के पवित्र रौज़ों को तोड़े जाने की अपील की थी, जिसके बाद इस संकट ग्रस्त देश में एक नई समस्या ने जन्म ले लिया है।

अल-मसूदी की इस अपील के बाद, प्रदर्शनकारियों ने अल-सर्ख़िया संप्रदाय के धार्मिक केन्द्रों को बंद कर दिया है, वहीं दीवानिया, समावा और बाबिल स्थित केन्द्रों को आग के हवाले कर दिया है।

सूत्रों का कहना है कि अली मूसा आकूल काज़ेमी अल-मसूदी को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

इराक़ के एक धर्मगुरु और राजनेता अम्मार हकीम ने बुधवार को एक बयान जारी करके अल-मसूदी की इस अपील की कड़ी निंदा की और कहा कि इसके पीछे कोई ख़तरनाक साज़िश रची जा रही है, जिसका पर्दाफ़ाश होना चाहिए।

उन्होंने इराक़ी जनता से समझदारी दिखाने का आहवान किया और सरकार से कहा कि जो कोई भी पवित्र धार्मिक स्थलों का अनादर करे, उसके साथ सख़्ती बरती जाए।

ग़ौरतलब है कि अल-सर्ख़िया इराक़ में एक नया संप्रदाय है, जिसके मानने वाले देश में होने वाली हालिया कुछ आतंकवादी घटनाओं और हमलों में शामिल रहे हैं।

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