Thursday, April 25, 2024
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कोरोना – पुलिसकर्मी ने लिखा कोरोना का दर्द

दिल्ली- जहां पूरे भारत मे हर एक इंसान कोरोना से लड़ता नज़र आ रहा है वहीं 24 घंटे हमलोगों के साथ खड़े इस लड़ाई में सबसे आगे डॉक्टर, पुलिस, पत्रकार और सफाई कर्मी ही हैं.. जो अपनी जान की परवाह न करते हुए अपना धर्म निभा रहे हैं.. वहीं ऐसे में दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर राकेश दुहन ने एक ऐसी कविता कोरोना पर लिखी हैं जिसे पढ़कर आंख से आंसू तक आ जाएं, और इंसान ये खुद अपने अंदर ये झांकने को मजबूर हो जाये कि हम चाहे कितने भी ताकतवर हो जाये ईश्वर के आगे किसी की नहीं चलती, और हम सब बेबस है. और हमें ईश्वर ही हर परेशानी से दूर करवा सकता है.. पढ़िये क्या लिखा है उन्होंने अपनी कविता में…..

आया कैसा ये कठिन दौर है

दुनिया में चीत्कार चारों ओर है, आया कैसा ये कठिन दौर है ||

 

मनुज जिसने प्रकृति का जी भर के दोहन किया,

एक निशाचर की भांति शोषण व भक्षण किया |

शहर सूने, गाँव सूने, गलियां भी वीरान व सुनसान हैं,

ये देखकर आज जग हैरान है

दुनिया में चीत्कार चारों ओर है, आया कैसा ये कठिन दौर है ||

 

सबल मानव जिसने परमाणु बमों का सृजन किया,

एक विषाणु के आगे भयभीत है, लाचार है

पसरी है वीरानी, हर तरफ रुकी हुई सासें हैं,

शमशान सी बनी ये धरा हर ओर जलती हुई लाशें हैं।

दुःख व ख़ामोशी चारों ओर है, आया कैसा ये कठिन दौर है ||

 

हुई भूल मनुज से, जो इस धरा से छल किया,

समय का पहिया रुक गया, कोई ले रहा इम्तिहान है,

मनुज जिसने ईश्वर से भी प्रपंच किया, आज विनती कर रहा उसी प्रभु से इंसान है,

फैला अँधियारा चारों ओर है, आया कैसा ये कठिन दौर है ||

 

खेत और खलिहान सूने, कैसी है अनोखी ये बेला,

घरों में छुप गया इंसान है, दिलों में उठ रहा तूफ़ान है

हैं कुछ लोग सेवा की खातिर रणभूमि में डटे हुए,

काल से कर रहे हैं युद्ध, हैं ये देव कोई या फिर भगवान हैं

फैला भय का धुआं जग में चारों ओर है| आया कैसा ये कठिन दौर है ||

 

नदियाँ हुई हैं निर्मल व स्वच्छ, दिखने लगीं ये दर्पण की भाँति,

तारे भी दृश्यमान होने लगे हैं अब तो नभ में,

मनुज से बचकर हवा हुई है सुगंध से भरी हुई,

नीले आकाश में पंछियों के कलरव का शोर है,

प्रकति का बदला रंग चारों ओर है, आया कैसा ये कठिन दौर है || 

दुनिया में चीत्कार चारों ओर है, आया कैसा ये कठिन दौर है ||

रचनाकार – राकेश दुहान, दिल्ली

 

 

 

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