Thursday, April 25, 2024
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हज न कर पाएं हो तो एतेकाफ में बैठ जाएं। क्या होता है एतेकाफ पढ़िए

V.o.H News: दिल्ली – रमज़ान का महीना पवित्र महीना होता है और इस महीने में इबादत और नेकियाँ ही सबसे ज़्यादा होती है और कहते हैं कि इस महीने में शैतान को कैद करलिया जाता है। वहीं इस महीने में कमसे कम 3 दिन तक लोग मस्जिद में एतकाफ करते हैं। एतेकाफ में अपना घर भार छोड़कर मस्जिद में मोमीन जाते हैं और कहा जाता है जो हज न कर पाए वो एतेकाफ में बैठ जाये।

शिया जामा मस्जिद कश्मीरी गेट में भी शुरू हुए एतेकाफ

शिया जामा मस्जिद कश्मीरी गेट में भी शनिचर से एतेकाफ शुरू हो गए हैं। जिसमे सुबह सेहरी के वक़्त दुआ, दुआ ए मेहराज समेत कई दुआएं होती है। उसके बाद ज़ोहर के वक़्त भी दुआ होती और दिन भर दुआएं मजलिस, ज़ियारत ए आशूरा समेत कई दुआएं पढ़ाई जाती है। जिसमें पेश इमाम मौलाना मोहसिन तकवी समेत कई वरिष्ठ मौलाना यहां आते हैं और दीन की बातें बताते हैं।

दीन के साथ साथ दुनिया का भी इल्म

आपको बतादें एतेकाफ में दीन की तालीम के साथ साथ दुनिया की भी तालीम दी जाती है कि किस तरह से दुनिया के साथ रहकर इंसानियत का पैगाम देना है। और नेक रास्ते पर चलते हुए देश की सेवा करते रहना चाहिए। 

 

पूरी दिल्ली के लोग आते हैं

आपको बता दें इस एतेकाफ मे दिल्ली के हर इलाके से लोग आए थे वो अपने साथ कपड़े लेकर यहां आते हैं। और मस्जिद के बाहर नही जाते हैं। 

एतेकाफ का क्या है नियम

एतेकाफ हर रमज़ान में होता है और ये कमसे कम 3 दिन का होता है। इसमें जो भी मोमीन बैठना चाहे वो सेहरी से पहले मस्जिद में दाखिल हो जाये और अगले 3 दिन तक मस्जिद में ही रहे। तीसरे दिन में मग़रिब के बाद एतेकाफ खत्म हो जाता है और फिर हम घर जा सकते हैं।

 

10 से लेकर 70 साल तक के बुज़ुर्ग आये एतेकाफ में

दिल्ली के शिया जामा मस्जिद के एतेकाफ में 10 साल से लेकर 70 साल के मोमीन आये हुए हैं। और एतेकाफ में बैठे हुए है। जो डेली रोज़ा रखते हैं और इबादत करते रहते हैं। साथ ही मस्जिद को बिल्कुल साफ सुथरा रखते हैं। वहीं जाफराबाद में भी एतेकाफ शुरू हो चुके हैं साथ ही ओखला में बाबुल इल्म मस्जिद में भी एतेकाफ खत्म हो चुके हैं।वहीं दिल्ली में कई जगह पर एतेकाफ किया जा रहा है।

 

आइये दिखाते हैं आपको मस्जिद में किस तरह से होती है इबादत

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