Thursday, April 25, 2024
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मेट्रो फेस 3 की अगर जानलीं चुनौतियां- तो ज़रूर मेट्रो को चमत्कार ही कहेंगे आप

अली अब्बास नकवी- विशेष संवाददाता

 

उफ्फ.. कितने दिन हो गए मेट्रो स्टेशन कब बनेगा.. कब चलेगी यहां से मेट्रो.. जैसे ही मेट्रो चलेगी यहां से उसके बाद से बहुत लोगों को फायदा होगा..

 

जी हां. ये आम लोगों की बाते हैं जिन्हें मेट्रो के नए फेस तैयार होने का इंतेज़ार रहता है लेकिन शायद जनता ये नहीं जानती होगी कि कितनी मेहनत और कितनी बड़ी चुनौती होती है ज़मीन के नीचे और उपर से मेट्रो को शुरू करना..कैसे बिना किसी को परेशान करते हुए, बिना कोई ट्रैफिक रोके हुए, बिना किसी ऐतिहासिक जगह से छेड़छाड़ के उसके नीचे से मेट्रो निकालना एक चमत्कार से कम चीज़ नहीं है..

 

जी हां.. किस तरह से दिल्ली मेट्रो ने अपना सफर तय किया और किस तरस से दिल्ली मेट्रो के फेज़ 3 के निर्माण के दौरान क्या क्या चुनौतिया आई.. इन तमाम मुद्दों पर दिल्ली मेट्रो के कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने एक पुस्तक लिखी.. जिसका नाम हैं DELHI METRO PHASE- 3 CHALLENGES. जिसका विमोचन खुद दिल्ली मेट्रो के प्रबंध निदेशक डॉ मंगू सिंह और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मेट्रो भवन में किया।

ये पुस्त बहुत ही आसान भाषा में लिखी गई है. जिसमें मेट्रो विस्तार के तीसरे चरण के तहत मुख्य कॉरीडोर मजलिस पार्क, शिव विहार पिंक लाइन, जनकपुरी वेस्ट- बॉटनिकल गार्डन मेजेंटा लाइन और केंद्रीय सचिवालय – कश्मीरी गेट वायलेट लाइन के निर्माण के वक्त सिविल इंजीनियरिंग चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है.. क्योंकि ये सभी कॉरीडोर में निर्माण करना आज से 20 साल पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था.. क्योंकि ये सारे के सारे कॉरीडोर भीड़ भाड़ वाले आवासीय और व्यावसायिक इलाकों से निकलते हैं.. साथ ही साथ लाल किला जामा मस्जिद जैसे इलाके में कई पुरानी ऐताहिसिक इमारतें थी जिन्हें बिना क्षति पहुंचाए मेट्रो का निर्माण करना बहुत बड़ा चैलेंज था.. साथ ही साथ अगर आप पुरानी दिल्ली की जगह को देखें तो वहां से किस तरह से मेट्रो निकाली गई ये बहुत सोचने वाली बात है..

वहीं इस किताब में कुछ महत्वपुर्ण चीज़े भी बताई गई है.. जोकि सामान्य ज्ञान के लिए भी छात्रों को काफी उपयोगी रहेगी..

पहले सबसे नीचे चावड़ी बाज़ार मेट्रो स्टेशन था लेकिन अब हौज़ खास मेट्रो स्टेशन है, वहीं सबसे उंचाई पर धौला कुआं मेट्रो स्टेशन है..

वहीं पत्रकारों से बातचीत में मेट्रो के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने बताया कि आश्रम मेट्रो स्टेशन बनाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.. डीडीए ने मेट्रो को ज़मीन दे दी थी जिसके बाद उसमें काम भी शुरू हो गया था लेकिन ज़मीन का केस चलने के कारण काम रोकना पड़ा, जिसके बाद मेट्रो अधिकारियों ने 250 करोड़ रुपये तक की पेशकश उस ज़मीन के लिए करदी थी लेकिन ज़मीन मालिकों में आपस में मनमुटाव था जिसके बाद से वो ज़मीन मेट्रो को नहीं मिल सकी.. लेकिन दिल्ली मेट्रो प्रबंधक कमेटी ने हार नहीं मानी और निदेशक मंगू सिंह के सुझाव से उस पूरे मेट्रो स्टेशन को 151 मीटर में बना दिया और 135 मीटर में ही प्लेटफॉर्म तैयार कर दिया.. जो कि बहुत बड़ी सफलता दिलली मेट्रो के लिए हुई.. वहीं देखा जाए तो इस तरह दिल्ली मेट्रो ने 250 करोड़ रुपये खुद बचा लिए। जो कि एक काबिले तारिफ कदम था।

वहीं मंगू सिंह ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम की होती है.. यह मशीन बस सीधी चलती है.. और बैक नहीं हो सकती है.. साथ ही जहां खराब हो जाए उसे निकालना बहुत बड़ी चुनौती होता है. इसका हमें काफी ख्याल रखना होता है.. साथ ही सिंह ने कहा कि फेस 3 का पूरा निर्माण होने के बाद मेट्रो तकरीबन 300 किमी.तक की रेंज बना लेगी.. और हम जिसके बाद ज़रुर टॉप 1 में पहुंच जाएंगें। वहीं मंगू सिंह ने कहा कि मेट्रो के काम में किसी भी तरह के फंड की परेशानी नहीं होती है। हमें पूरा सहयोग मिलता है।

 

वहीं डीएमआरसी की जितनी तारिफ करें वो कम है.. सफाई, सुरक्षा, महिला प्रोत्साहन, कर्मचारियों का जनता के प्रति बर्ताव, कोई चीज़ अगर खो जाए तो मिलना आदि ऐसी चीज़े है जिससे हर दिल्ली वासियों का दिल फख्र से उंचा हो जाता है.. और हर किसी के दिल से यहीं दुआ निकलती है कि दिल्ली मेट्रो विश्व में अपना परचम लहराए।

 

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