Saturday, May 25, 2024
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नागपुर: गरीबों का फ्रिज कहे जाने वाले घड़े तैयार, नहीं है खरीदार

दिल्ली(प्रिया): लाॅकडाउन इसी तरह जारी रहा और राहत न  मिली तो मेहनत बरबाद होने का डर इन कुम्हारो को सता रहा है।

जब से लॉकडाउन की घोषणा हुई है तब से इनके व्यवसाय पर काफ़ी असर हुआ है,ग़रीबों का फ्रिज कहे जाने वाले ये घड़े तैयर तो है पर ख़रीदार कही नज़र नहीं आ रहे है। मार्च और अप्रैल ये दो महीने ऐसे होते हैं जब कुम्हारों के व्यवसाय का मौसम होता है।अलग अलग आकार के घड़े इन गांवो मे बनाये जाते हैं, आम तौर इसकी किमत 70 से 250 रुपये तक होती है. नागपुर के पास महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश कि सीमा पर जो गांव बसे हैं उनमें घड़े बनाने का काम होता है। सबसे बड़ी बात यह भी है, हर साल जहाँ अक्षय तृतिया के मौके पर घड़ों की बड़ी मात्रा में बिक्री होती है, लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण अक्षय तृतिया कुम्हारों के लिये आफत बन गई है। हालांकि सूत्र के मुताबिक़, 20 अप्रैल से कुछ चुनिंदा व्यवसाय और उद्योंगों को रियायत मिल सकती है।

 

 

 

 

 

 

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