Saturday, April 13, 2024
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विदेशों में हो रहा भारतीय महिलाओं पर अत्याचार, कब जगेगी हमारी सरकार

नई दिल्ली -दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पीड़ित पत्नियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें देश भर में मौजूद हर धर्म की महिला के साथ उनके पतियों के अत्याचार के बारे में बताया गया। आपको बता दें इन महिलाओं का आरोप है कि इनके पति विदेश में शादी करके चले जाते है और कुछ वक्त में उन्हें छोड़ देते हैं जिसके बाद पत्नियां कुछ नही कर पाती है। गौर करने वाली बात ये है कि हर धर्म की महिलायों के साथ ये हुआ है और किसी किसी महिला को उनके पतियों ने विदेश से ही तलाक दे दिया है। 
 
 विदेश में शादी करके एनआरआई पति छोड़ देते हैं पत्नियों को
 
सोच फ़ाऊंडेशन ने इन सभी पीड़ित महिलाओं को एक साथ खड़ा किया है और अब ये एक साथ खड़ी है और सरकार से कठोर कार्रवाई की मांग कर रही है। साथ ही पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि जिनसे उनकी शादी होती है उन्हें पता चलता है कि उनके पति ने पहले से ही किसी और महिला से शादी कर रखी है। विदेश में एक बहुत बड़ी कंपनी में काम करने वाले एक दुबई में रहने वाले शक्श अली मुर्तज़ा ने भी लखनऊ से जुबी ज़ैदी से शादी की थी। पीड़िता जुबी ज़ैदी का कहना है कि उनकी शादी कुछ साल पहले हुई थी जिसके बाद जब वो विदेश में शादी के बाद रहने लगी तो उन्हें प्रताड़ित किया जाता था और उनसे कहा जाता था कि टॉयलेट साफ करो क्योंकि इंडिया के लोग सिर्फ गन्दगी की साफ करते हैं। लेकिन जुबी ने हार नही मानी और रिश्ते को चलाती रही लेकिन कुछ ही वक़्त में उन्हें पता चलता है कि उनके पति ने पहले से ही शादी कर रखी है और उनका 10 साल का बेटा भी है जैसे ही उन्होंने इस बात का विरोध किया कि उन्हें क्यों धोखा दिया गया तो जुबी को तलाक के पेपर सौंप दिए जाते हैं जबसे वो इंडिया में इस चीज़ की लड़ाई लड़ रही है और आज उनके साथ तकरीबन 200 से ज़्यादा महिलाएं साथ है।
 
केलिफोर्निया के शेल्टर में रहने को मजबूर है पीड़ित महिला
वहीं एक पीड़िता की तरफ से आये परिजन ने बताया कि उनकी बहन केलिफोर्निया के एक शेल्टर में रहने को मजबूर है। उसके पति ने उसे धक्के मारकर बाहर करदिया है। जिसके बाद वो एक शेल्टर में हक़ की आवाज़ के लिए खड़ी है और कोर्ट के चक्कर काट रही है। लेकिन उसकी कोई मदद नही हो रही है।
 
हिन्दुतान के लोग भी नही पीछे
वहीं एक और चौकाने वाला केस सामने आया एक फिजी देश की नागरिक भी प्रेस से मुखातिब हुई उन्होंने कहा कि दिल्ली का रहने वाले एक व्यक्ति ने उससे शादी की और अब उससे छोड़ रखा है। यहां तक कि जीबी रोड तक पर वो जाता है।
 
राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज से करेंगी पीड़िता मुलाकात
ये सभी पीड़िता कल देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलने का समय मांगा है और ये अपनी बात भारत सरकार से रखेंगी की उन एनआरआई पर सख्त एक्शन लिया जाए।और उनके पासपोर्ट जब्त किए जाए।
 
पंजाब से 27000 महिलाएं हैं पीड़िता
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आये पंजाब से महिला इशू पर काम करने वाले लोगों ने बताया कि तकरीबन 27000 महिलाएं इस तरह से एनआरआई पतियों का शिकार बनी है और घुट घुट कर अब जिंदगी गुज़ारनी पड़ रही है। आपको बता दें प्रेस कॉन्फ्रेंस में बता उन पत्नियों की अथाह पीड़ा को बयान किया जिन्हें पति द्वारा छोड़ दिया गया। NRI के धोके में आकर शादी करने वाली महिलाओं को मानसिक यातना के अलावा शारीरिक यातनाओं से भी गुज़रना पड़ रहा है। 
 
 
पीड़िता के साथ साथ मां बाप भी झेलते हैं परेशानी
 
 तरनजीत कौर और जूबी ज़ैदी ने कहा कि कैसे NRI पतियों द्वारा छोड़ी गई इन लड़कियों के माँ बाप एक लंबी क़ानूनी लड़ाई झेलते हैं और उनको तमाम तरह की मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। FIR से लेकर सज़ा दिलवाने तक की मुहिम लंबी और काटों भरी है और इतना सब करने के बाद भी  उन्हें कामयाबी नहीं मिलती दिखती है।
 
वहीं इन पीड़िताओं के केस लड़ रहे अधिवक्ता अमन उस्मान ने कहा कि एक पीड़ित महिला केलिफोर्निया के एक शेल्टर में रह ही है जिसे उसके पति ने घर से निकल दिया है। वो दर दर की ठोकर अपने देश से हज़ारों किमी दूर अकेली रह रही है और अपने हक़ की आवाज़ उठा रही है। सरकार चाहे तो उन लोगों के पासपोर्ट कब्ज़ कर सकती है जिनके खिलाफ समन भेजा गया है और उन्होंने जवाब नही दिया है।
 
वहीं एक पीड़िता की तरफ से आये हुए अमरजीत सिंह ने कहा कि कैसे उनकी बहन को आर्थिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता है ये वोही बेहतर जानते हैं। विदेशों में पति आराम से रह रहे हैं और उन्हें किसी चीज़ का खौफ नही है।
लोगों ने इसे पेशा बना लिया है कि भारत से लड़कियों से शादी करो कुछ समय वहां रहो और उन्हें उसके बाद छोड़ दो। और उस महिला की ज़िंदगी नर्क बना दो। 
 
सोच फ़ाऊंडेशन ने अपने सुझाव और माँगे रखी जिनका सीधा सरोकार- विदेश मंत्रालय, अदालतों, राष्ट्रीय महिला आयोग और जिला प्रशासन से है जिसमें पुलिस भी शामिल है। सोच फ़ाऊंडेशन की माँग है कि इन संस्थाओं को पीड़ित के समर्थन में पूरी तरह आना चाहिए ताकी NRI पतियों द्वारा सताई गई महिलाओं को न्याय मिल सके और आगे दूसरी लड़कियाँ ऐसे धोकेबाज पतियों से बचाई जा सकें। साथ ही साथ विदेश मंत्रालय से ये निवेदन किया कि जो पीड़िताएं विदेश में तन्हा रह रही है और अपने हक़ के लिए लड़ रही है उन्हें वित्तीय सहायता दी जाए।
भारत सरकार को इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच करा कर दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करना चाहिये।
साथ ही उन पतियों का पासपोर्ट कुर्की किया जाए, और पीड़ित महिलाओं को प्रॉपर्टी में भी हिस्सा दिया जाए।और उन्हें समन दिया जाए जिससे उन्हें सख्त से सख्त सजा का खौफ रहे
 
साभार ईटीवी भारत
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