Thursday, April 25, 2024
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रोहिंग्या मुस्लिमों का दर्द लिखने पर, BJP ने महिला नेता को पार्टी से निकाला

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दिसपुर। भारतीय जनता पार्टी ने तीन तलाक से पीड़ित अपनी एक मुस्लिम नेता को सस्पेंड कर दिया है। उस नेता ने सिर्फ फेसबुक पर रोहिंग्या मुसलमानों का समर्थन किया था। असम बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य और तीन तलाक के खिलाफ पार्टी का चेहरा रहीं बेनजीर अरफां को रोहिंग्या मुसलमानों का समर्थन करने पर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। वह 2012 से बीजेपी के साथ जुड़ी थीं।

बेनजीर का कहना है कि गुरुवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने उन्हें पार्टी से निष्कासित करते हुए वॉट्सऐप पर सस्पेंसन लेटर भेजा। 30 वर्षीय बेनजीर ने अपने निलंबन को मनमाना बताते हुए कहा कि उन्हें उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और उनसे संपर्क किए बिना ही उन्हें निलंबित कर दिया।

बता दें कि बेनजीर पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और बीजेपी मजदूर मोर्चा की कार्यकारिणी की सदस्य हैं। बेनजीर ने पार्टी से निलंबित होने के बाद लिखा, “विडंबना देखिए, मैं तीन तलाक की शिकार रही हूं, मैंने नरेंद्र मोदी सरकार के पक्ष में तीन तलाक के खिलाफ कैंपेन चलाया और अब मेरी पार्टी जिससे मैं सालों से जुड़ी थी मुझे तीन तलाक दे दिया।”

आपको बता दें कि एक स्थानीय एनजीओ ने शनिवार को म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में म्यांमार की समस्याओं पर भूख-हड़ताल का आह्वान किया गया था। जिसके बारे में बेनजीर ने अपने फेसबुक में पोस्ट डालकर समर्थन किया था।

बीजेपी की असम इकाई के महासचिव दिलीप सैकिया ने बेनजर को पार्टी से पूर्व अऩुमति लिए बिना सोशल मीडिया पर म्यांमार की समस्याओं पर भूख-हड़ताल का आह्वान करने के लिए कार्रवाई की है। सैकिया ने निलंबन के आदेश में लिखा है कि बेनजीर का आह्वान पार्टी के सिद्धांतो के खिलाफ था और असम बीजेपी के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने बेनजीर को निलंबित करने का निर्देश दिया है।

नजीर ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर “प्रार्थना सभा” की जगह गलती से “प्रतिरोध सभा” लिख दिया। बेनजीर ने कहा कि उन्होंने अपनी गलती मान ली थी और उन्हें लगा कि ये मामूली भूल है लेकिन पार्टी द्वारा बगैर सुनवाई के निलंबित किए जाने से स्तब्ध रह गयीं। बेनजीर ने पिछले साल असम चुनाव में राज्य की जानिया विधान सभा सीट से चुनाव लड़ी थीं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

मीडिया से बात करते हुए बेनजीर अरफां ने कहा कि जो सस्पेंसन लेटर उन्हें मिला है उसमें लिखा गया है, ‘किसी दूसरी संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम जो रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन के लिए था उसमें आपने बिना पार्टी की मर्जी से हिस्सा लिया। ऐसा करना पार्टी के नियमों को तोड़ना है जिस कारण आपको तत्काल प्रभाव से पार्टी से बर्खास्त किया जाता है।’

बेनजीर का कहना है कि इस कार्यक्रम के बहाने मुझ पर निशाना साधा जा रहा है। बेनजीर का आरोप है कि कुछ स्थानीय बीजेपी नेताओं को उनकी कार्यशैली पसंद नहीं आ रही थी इसलिए उन्हें इस छोटे से मुद्दे को लेकर बलि का बकरा बनाया गया है।

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