Saturday, November 26, 2022
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द्वापर युग मे सन्त श्रंगी ऋषि की तपोभूमि का इतिहास जानिए

फर्रुखाबाद (आमोद तिवारी) : भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए मध्य प्रदेश के भक्त सूबे की सीमा लांघ यूपी में श्रंगीरामपुर के गंगा तट पर कांवर में गंगा जल भरने पहुंच रहे है ।  उनकी यह साधना वर्षों पुरानी है. भोले बाबा ने उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी की हैं ।  और इसीलिए उन्हें भोले पर ही भरोसा है।

 

द्वापर युग मे सन्त श्रंगी ऋषि  की तपोभूमि का इतिहास जानिए – श्रंगी ऋषि को श्राप के कारण उनके सींग निकल आये थे । श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने ने गंगा की यात्रा शुरू की थी। जब उनके सींग का घटना शुरू हुआ था उसका नाम ढाईघाट पड़ गया । उसके बाद वह गंगा के किनारे एक बाग में तपस्या करने लगे जहाँ पर उनके सींग समाप्त हो गए थे।वही पर कलयुग में ही उनकी सेवा करने वालो ने गांव बसा लिया जिसका नाम भी श्रंगी ऋषि के नाम पर श्रंगीरामपुर रखा गया था ।

 

यहां पर कैसे पहुंचते लोग जानिए- इस महान ऋषि के दर्शन व गंगा घाट पर स्नान के लिए यदि ट्रेन से आना हो तो उन्ही के नाम से रेलवे स्टेशन है । निजी वाहन से किसी भी हाइवे से आसानी से पहुंचा जा सकता है । कानपुर से आने वाले भक्त भी रजीपुर कस्वा मुख्य मार्ग पर उतर कर टैक्सी से पहुंच सकता है ।

 

आखिर यह कावरिया कहा चढाते गंगा जल जानिए – तीन- चार सौ किलोमीटर पैदल चलकर पृथ्वी राज चौहान द्वारा स्थापित वन खंडेश्वर शिव मंदिर में कांवर में रखा गंगा जल चढाने से भोले बाबा उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं । महाशिवरात्री के मौके पर भक्तों में कांवर चढाने को लेकर गजब की श्रद्धा है । कांवरियों का जोश और जूनून देखते ही बनता है । कांवरियों में महिलायें भी शामिल है । ऐतिहासिक तीर्थ स्थल श्रंगीरामपुर में महाशिवरात्रि तक चलने वाले कांवरिया मेले में लाखों की भीड़ आ रही है।

 

आखिर यहाँ से क्यो भरा जाता गंगा जल जानिए – वनारस व काशी के बाद फर्रुखाबाद जिले को अपरा काशी कहा जाता है।जिसका जिक्र महापुराणों में भी मिलता है।काशी के सबसे अधिक शिवालय फर्रुखाबाद में हुआ करते थे लेकिन आज नही मिलते है।गंगा जी तट है उसी बजह से कांवरिया यहां से जल भरने आते है।

 

कांवरियों का सैलाब उमड़ पड़ा कहा लगता जाम – रजीपुर-जरारी मार्ग एवं रजीपुर-श्रंगीरामपुर मार्ग पर कांवरियों के जत्थों की लाइनें टूटने का नाम ही नहीं ले रही थीं। रजीपुर चौराहे पर जाम की स्थिति बनी रही। कानपुर-फतेहगढ़ मार्ग से गुजरने वाले वाहनों को निकालने के लिये पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। श्रंगीरामपुर गंगा तट से जल भरकर भोले तेरी बम के जयघोष के साथ कांवरियों के जत्थे शिवालयों की ओर रवाना होने शुरू हो गए। कांवरियों के जत्थे में महिलाएं भी शामिल रहीं। महाशिवरात्रि तक ऐतिहासिक तीर्थ स्थल श्रंगीरामपुर में चलने वाले कांवरिया मेले में भीड़ शुरू हो गयी है। मेले में लगी कांवर सजाने के सामान आदि की दुकानों पर भी रौनक नजर आने लगी। 

 

गंगा घाट पर कहा से आते लोग जानिए – पड़ोसी जनपद एटा, इटावा, कन्नौज आदि के अलावा मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया आदि से भी कांवरिये यहाँ आते हैं. हर जत्थे के साथ उनके निजी रक्षक भी हाथ में डंडे और हाकी लिए मुस्तैद नज़र आ रहे हैं. पैरों में घुंघरू बांधे कांवरिये विशेष तर्ज में साखी गाते हुए आगे बढ़ रहे हैं. भिंड से आये भक्तो ने बताया कि कांवर चढाने से उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।

 

मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों से श्रद्धालु श्रंगी ऋषि की तपोभूमि श्रंगीरामपुर में कांवर में जल भरने के लिए प्रतिवर्ष आते हैं । इस बार भी कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। 

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