Thursday, April 25, 2024
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ठंड शुरु हो गई, नगर पंचायत नौगावां सादात ने न तो अलाव शुरु कराए और न ही रेन बसेरे बनाए।

नौगावां सादात(शहजाद आब्दी)। दिसंबर माह शुरू होते ही ठंड ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सर्दी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। ठंडक दिन-प्रतिदिन सितम ढा रही है। इससे निपटने के लिए प्रशासन के इंतजाम नदारद दिख रहे हैं।  नगर पंचायत नौगावां सादात ने अभी तक रैन बसेरों की व्यवस्था नहीं की है। ठंड बढ़ रही है नगर में अलाव की भी व्यवस्था नहीं हुई है। 

शाम को ठिठुरन बढ़ते ही राहगीर अलाव की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। लेकिन ठंड को लेकर नगर पंचायत नौगावां सादात गंभीर नजर नहीं आ रही है। सर्दी के 15 दिन बीत जाने के बावजूद कस्बे मे रैन बसेरे की व्यवस्था नहीं की गई है और न ही नगर पंचायत द्वारा कस्बे में अलाव का इंतजाम कराया गया है। जिसके चलते राहगीर, दुकानदार तथा सड़कों पर रहने वाले लोग सर्दी में रहने पर मजबूर हैं या फिर ठंड से बचने के लिए अपनी जेब से लकड़ी लाकर अलाव जला रहे हैं। 

हुसैनी चौक पर काफी शाप चला रहे गुलशन अब्बास ने बताया की आसपास के दुकानदारो ने नगर पंचायत में अलाव जलने हेतु अर्जी भी दी है मगर उनकी अर्ज़ीं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नाम ना लिखने की शर्त पर एक सभासद ने बताया की पिछले बरस लगभग  चार लाख  50 हजार रुपये अलाव जलवाने के लिए नगर पंचायत द्वारा खर्च किए गए थे। कसबे के सभी सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाए जाने थे। पिछले बरस 15 से अधिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई थी।  लेकिन इस बार यह पूरी प्रक्रिया ठप चल रही है।

ऐसे में मुसाफिर अलाव तापने के लिए जद्दोजहद करते रहते हैं। उनको अलाव नहीं मिल पा रहा हैं। हर साल नगर पंचायत सभागार पर एक पर्चा लगाकर हाल को रैन बसेरा घोषित कर दिया जाता था। जबकि यह हाल खुला हुआ है जो रैन बसेरा बनाये जाने के लिए उपर्युक्त नहीं है। इस बार ये स्थान भी सुना पड़ा हुआ है। अभीतक कहीं पर भी रैन बसेरा नहीं बनाया जा सका है।

इससे शाम के समय सर्दी का प्रकोप बढ़ते ही गरीब लोग छत की तलाश में भटकने लगते हैं। वे खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। वही नगर पंचायत प्रशासन पर केवल कागजों पर ही अलाव जलवाने के आरोप लग रहे हैं। अब देखना है कि मुसाफिरों व रिक्शा चालको एवं बे घरो के लिए नगर पंचायत प्रशासन रैन बसेरे व अलाव की ज़रुरत को समय से पुरा कर पाती है या सिर्फ कागजों में ही रैन बसेरा बनेगा व अलाव जलाया जायेगा।

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