Tuesday, June 25, 2024
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दुनियाभर के नेता जो नहीं कर पाए कोरोना ने किए वह अच्छे काम!  

कोरोना वायरस ने वैसे तो दुनिया भर में तबाही मचा दी मगर फ़्रांस के लेज़ इकोज़ अख़बार ने अपने एक लेख में ध्यान केन्द्रित कराया है कि इस महामारी ने पांच वह बड़े काम कर दिए जो बहुत ज़्यादा कोशिशों, विवादों और झड़पों के बावजूद भी नहीं हो पा रहे थे।

 

प्रदूषण में बहुत ज़्यादा कमी

वर्ष 2020 शुरू होने के समय से ही यह विचार आम था कि धरती अब प्रदूषण के उस स्तर पर पहुंच चुकी है कि  इसे कंट्रोल करना संभव नहीं है। प्राकृतिक आपदाएं बहुत तेज़ी से बढ़ने लगीं। आस्ट्रेलिया के जंगलों में इसी वजह से आग लग गई और जानवरों की सैकड़ो प्रजातियां जल कर ख़त्म हो गईं। शहरों में लोग सांस नहीं ले पा रहे थे। बहुत से शहरों में अलग अलग कार्यक्रम लागू किए गए कि किसी तरह प्रदूषण कम हो।

 

कोरोना वायरस आया तो यह समस्या ख़ुद बख़ुद हल हो गई। गाड़ियां ठप्प हो गईं उद्योग बंद हो गए। गैस का उत्सर्जन रुक गया। सैटेलाइट की तसवीरों से साफ़ दिखाई देने लगा है कि प्रदूषण बिल्कुल कम हो गया है।

 

दुनिया में झड़पें और जंगें शांत हुईं

कोरोना ने युद्धरत पक्षों को शांत कर दिया। कुछ जगहों पर युद्ध विराम या कम से कम युद्ध विराम की बातें होने लगीं। फ़िलिपीन और कैमरोन में गुटों की लड़ाई थमी। सीरिया में भी झड़पों में कमी आ गई। इस वायरस के डर ने पलायन को भी रोक दिया।

 

सरकारों ने बाज़ार की मदद के लिए ख़ज़ाने खोले

सरकारें कोरोना से पहुंचने वाले आर्थिक झटके को रोकने के लिए अब बाज़ारों में हस्तक्षेप कर रही हैं और पैकेज दे रही हैं जिसके लिए वह पहले तैयार नहीं होती थीं। अब सैकड़ों अरब डालर की रक़म खर्च की जा रही है कि कारख़ानें चलें और लोगों का रोज़गार सुरक्षित रहे।

 

आंदोलनकारियों की मांगें स्वीकार की गईं

फ़्रांस में येलो जैकेट आंदोलन कई महीनों से जारी था और सरकार प्रदर्शनकारियों की मांग नहीं मान रही थी मगर अब सरकार ने आर्थिक स्टेबलिटी क़ानून को भी ख़त्म कर दिया और रिटायरमेंट का नया क़ानून भी फ़िलहाल टाल दिया। इटली ने नौकरियों में कटौती पर रोक लगाई और अमरीका ने बेरोज़गारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया।

 

अचानक नज़र आने वाले दूसरे कई प्रभाव

कोरोना के कारण जब बाज़ार बंद हैं सीमाएं बंद हैं तो मादक पदार्थों का व्यापार भी रुक गया है। बहुत से क़ैदियों को जेल से छुट्टी मिल गई है जिनकी संख्या डेढ़ लाख से ज़्यादा है।

(साभार: pars today)

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