Thursday, April 25, 2024
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भारतीय मीडिया में हेडलाइन बनाने वाला ‘इमाम तौहीदी,’ एक फ़र्ज़ी मौलवी

नौगावां सादात: दो तीन सालों से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला एक मुस्लिम मौलवी भारतीय मीडिया में छाया हुआ है। अपने आपको इमाम कहने वाला मुहम्मद तौहीदी ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से इस्लामोफोबिया(इस्लाम का डर) फैलाने के लिए काफी मशहूर है।

मीडिया में छाये रहने की वजह ये है कि इसने 25 दिसंबर को एक ट्वीट किया था जिसमे लिखा था क्या मेरे पास भारत में ऑडियंस है? अगर इस ट्वीट पर मुझे जनवरी से पहले 10 हज़ार से ज़्यादा रीट्वीट मिल गये तो मैं भारत आऊंगा।

मुहम्मद तौहीदी 5 साल पहले अपने आप को ब्रदर तौहीदी फिर शेख तौहीदी और एक दो साल से इमाम तौहीदी बोलने लगा है और फेम की तरफ बढ़ने के लिए इसने हर तरीका अपनाया है। सुन्नी समुदाय को गाली देने वाले इस फ़र्ज़ी मौलवी को इसके समुदाय का ही समर्थन नही है और जब आप इससे ऐसा सवाल करेंगे जिसका इसके पास कोई जवाब न हो, तो ये आपको ब्लॉक कर देता है।

फ़र्ज़ी मौलवी होने का सबूत:

मुहम्मद तौहीदी खुद को ईरान की अल मुस्तफा यूनिवर्सिटी का ग्रेज्युएट बताता है। इसका दावा है कि इसने अल मुस्तफा विश्वविद्यालय से अपना ग्रेज्युएशन पूरा किया था। अल मुस्तफा यूनिवर्सिटी से तौहीदी के बारे में जानकारी ली गयी तो यूनिवर्सिटी अथॉरिटी ने साफ किया कि तौहीदी का शैक्षिक रिकॉर्ड संतोषजनक था और कई वार्निंग देने के बाद यूनिवर्सिटी ने इसे 27 मार्च 2012 को निकाल दिया था।

कौन लोग हैं जो तौहीदी को इमाम मानते हैं?

तौहीदी के फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर फॉलोवर देखने से साफ समझ में आता है की इसे अमन पसंद लोग नही बल्कि सिर्फ वो लोग हीरो और इमाम मानते हैं जो दिन रात इस्लाम के खिलाफ ज़हर उगलते रहते हैं और इस्लाम को नीचा दिखाने के लिए काम करते हैं। भारत में भी नादान लोग ये समझ बैठे हैं की तौहीदी पाकिस्तानियों की हक़ीक़त जानता है और इसलिए पाकिस्तान व पाकिस्तानियों से नफरत करता है।

पाकिस्तान से नफरत का सच

जो भारतीय तौहीदी के पाकिस्तान के खिलाफ बयान देख कर खुश होते हैं वो इस बात को शायद नही जानते हैं की तौहीदी पाकिस्तान और पाकिस्तानियों के खिलाफ इसलिए बोलता है क्योंकि वहां पर मुसलमानों के सुन्नी समुदाय के लिए ज़्यादा रहते हैं। इसका इतिहास बताता है कि अपने आप को इमाम ऑफ पीस बताने वाले इस फ़र्ज़ी मौलवी में सुन्नी समुदाय के लिए कितनी नफरत भरी हुई है। अपने पुराने ट्विटर अकाउंट @tawhidicom पर इसने सुन्नी समुदाय के खिलाफ खूब ज़हर उगला है।

भारतवासियों की एकता को खतरा

तौहीदी जैसे फ़र्ज़ी मौलवी दुनिया भर में मौजूद हैं जो दूसरे समुदाय के लोगों को गाली दे कर अपनी रोटी सेकते हैं। तौहीदी के भारत में प्रमोशन से साम्प्रदायिकता फैलने का भी खतरा है। तौहीदी साम्प्रदायिक बयान देने के लिए मशहूर है और जब कुछ लोग इसका इस्तेमाल मुस्लिमानों के बीच मौजूद एक खास समुदाय के खिलाफ करेंगे तो इससे भारत में माहौल खराब होने का खतरा है। तौहीदी का ये दावा कि वह ISIS जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ है इसलिए वह आम मुसलमान जैसा नही है, बिल्कुल ग़लत है क्योंकि अगर किसी भी आम मुस्लिम व्यक्ति से यह पूछा जाये कि ISIS जैसे संगठन आतंकवाद फैला रहे हैं या नही तो जवाब में यही मिलेगा की इस तरह के सारे संगठन आतंकवाद फैलाने के अलावा कुछ नही कर रहे हैं।

टीआरपी के बदले देशवासियों की एकता से सौदा

जिस तरह तारिक फतह मीडिया द्वारा भारत में साम्प्रदायिकता फैलाता है उस ही तरह ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला ये फ़र्ज़ी मौलवी मीडिया द्वारा ये काम करेगा। आश्चर्यजनक है जिस व्यक्ति को देश में कोई न जानता हो, जिसका देश से कोई लेना देना न हो, उसको मीडिया का एक वर्ग अपना अखबार बेचने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा भी टीआरपी के लिए इस्तेमाल करना देशवासियों की एकता से सौदे की तरह रहेगा।

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