Tuesday, July 16, 2024
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तीन तलाक बिल के विरोध में लाखों मुस्लिम महिलाएं  सड़कों पर उतरीं

 V.o.H News:( शहजाद आब्दी)-  मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर तहफ्फुज ए शरीयत कमिटी सहरसा के बैनर तले देश के विभिन्न क्षेत्रों की लाखों मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक बिल के विरोध में सड़कों पर उतर आई। विभिन्न क्षेत्रों से पटेल मैदान पहुची मुस्लिम महिलाओं ने अपने- अपने हाथों में तख्तियां लिए तीन तलाक बिल के विरोध में नारे लगा रही थी और मुस्लिम महिलाओं के हाथ में लिए तख्तियां पर हम कानून ए शरीयत के पाबंद है, तीन तलाक बिल वापस लो, शरीयत का कानून हमारा एजाज है, हमारी शरीयत में हस्तक्षेप बंद करो सहित कई नारे लिखे थे।

 

तीन तालाक के विरोध में प्रदर्शन करती महिलाएं
तीन तालाक के विरोध में प्रदर्शन करती महिलाएं
तीन तालाक के विरोध में प्रदर्शन करती महिलाएं
तीन तालाक के विरोध में प्रदर्शन करती महिलाएं

 

 

मुस्लिम महिलाओं के पटेल मैदान में पहुचने के बाद जुलुस सभा में तब्दील हो गया। डॉ. हिना फारूकी की अध्यक्षता व सबीहा रहमानी के संचालन में चली सभा को संबोधित करते हुए कई मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि हम महिलाएं तीन तलाक बिल का पुरजोर तरीके से विरोध करते है। सभा के बाद पटेल मैदान से मुस्लिम महिलाएं मौन जुलुस की शक्ल में निकलकर समाहरणालय के मुख्य द्वार पर पहुचकर डॉ. हिना फारूकी के नेतृत्व में महिलाओं का एक शिष्टमंडल जिला पदाधिकारी से मिलकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं बिहार के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौपा। सौपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि मुस्लिम महिलाएं तलाक विरोधी बिल जो कि लोकसभा में 28 दिसंबर 2017 को पास हुआ है उसका विरोध करते है एवं इस बिल को अविलंब वापस लेने की मांग करते है क्योंकि यह बिल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में खुला हस्तक्षेप है और भारतीय संविधान का उल्लंघन है। हम मुस्लिम महिलाएं शरीयत पर पूर्णतः विश्वास रखते है। इस्लाम में तलाक का प्रावधान महिलाओं के लिए अभिशाप नही वरदान है। यह बिल भारतीय संविधान द्वारा प्रदान किये गए महिलाओं के अधिकार और जेंडर जस्टिस के विरुद्ध है। मुस्लिम महिलाओं का मानना है कि तलाक विरोधी बिल बड़ी हड़बड़ी एवं जल्दबाजी में लोकसभा में पास करा दिया गया और इस बिल के तैयारी में किसी मुस्लिम विद्वान एवं इस्लामी विशेषज्ञयों से कोई राय नही ली गई जबकि उच्चतम न्यायालय के 22 अगस्त 2017 के फैसले के बाद ऐसे किसी बिल की आवश्यकता नहीं थी। यह बिल भारतीय संविधान और महिलाओं व बच्चों के हितों के विरुद्ध है। मुस्लिम महिलाएं यह मांग करती है कि इस बिल को तुरंत वापस लिया जाय साथ ही साथ राष्ट्रपति द्वारा संसद के संयुक्त अधिवेशन के संबोधन में मुस्लिम महिलाओं के सिलसिले में जो कष्टदायक एवं दिल को ठेस पहुंचाने वाले शब्दो की न केवल निंदा करते है बल्कि केंद्र सरकार से राष्ट्रपति द्वारा मुस्लिम महिलाओं के बारे में दिए गए बयान को संबोधन से हटाने की मांग करते है। मौके पर डॉ. कौकब सुल्ताना, महजबीन नाज, नोशाबा अब्दुल वदूद, उजमा रहमत, महजबीन नूरी, अनवरी प्रवीण, मुसर्रफ प्रवीण, फरहत जबी नाज, जीनत प्रवीण, प्रो. सूफिया रोखसाना, रेहाना खातुन, नोशीन अब्दुल कय्यूम, सफिया मोदी मौजूद थे। वही कार्यक्रम को सफल बनाने में पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य डॉ. अबुल कलाम, डॉ. तारिक, समाजसेवी उमर हयात उर्फ गुड्डु,मोहम्मद इरशाद आलम शाद, मो. आफताब आलम उर्फ हीरा, तारिक अनवर ,महबूब आलम जीबु, साबिर हुसैन, जावेद अनवर चांद, अंजुम हुसैन, गुलनियाज टिंकू, फिरोज आलम, शेर अफगान मिर्जा, मंजूर आलम, मोहिउद्दीन, हक साहब, इम्तियाज हन्नी, इस्लाम मुखिया, गुड्डु जमाल, सिब्बू राईन, मो. जमालउद्दीन, अतहर अली, शोएब सानू सहित कई लोग सक्रिय रहे।  

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