Thursday, April 25, 2024
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यूपी का क़र्ज़ माफ़ी बना मज़ाक: किसी के नौ पैसे तो किसी के दस रुपये माफ कर रही योगी सरकार

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में भाजपा नेताओं ने किसानों की कर्जमाफी का चुनावी वायदा कर बड़ी जीत हासिल की थी। सरकार बनने के बाद किसानों को पहली कैबिनेट मीटिंग से बड़ी उम्मीदें थीं। पहली मीटिंग के बाद जो घोषणा योगी सरकार द्वारा की गई उससे ही किसानों को खुद के साथ ठगी का एहसास हुआ लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

 

कैबिनेट मीटिंग के बाद ऐलान हुआ कि सिर्फ एक लाख तक के कर्ज माफ किए जाएंगे। इस ऐलान ने लोगों को 2014 में हुए फरेब की याद दिला दी कि किस तरह लोकसभा चुनाव के वादों को मोदी सरकार ने जुमला करार देकर पल्ला झाड़ लिया था।

हालांकि यूपी चुनावों के बाद सरकार वादे पर खरी उतरी और उसने कर्जमाफी में लिमिट का खेल कर दिया। अब किसानों के कर्ज तो माफ हो रहे हैं लेकिन कितने कर्ज माफ हो रहे हैं इसे देखकर सरकार पर तरस जरूर आएगा। सरकार ने निश्चित रूप से लघु सीमांत किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। 

मामला बिजनौर का है। यहां ऋण मोचन योजना में किसी किसान के 9 पैसे तो किसी किसान के 84 पैसे का कर्ज माफ हुआ है। पहले चरण में 22156 किसानों का ऋण माफ हुआ है। इनमें नगीना के किसान बलिया पर था 9 पैसे का कर्ज और बास्टा के किसान चरण सिंह पर था 84 पैसे का कर्ज था जिन्हें ऋणमुक्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं जिले के किसानों पर 2 रुपये व 3 रुपये तक का कर्ज माफ हुआ।

हिंदुस्तान अखबार ने जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के हवाले से कुछ आंकड़े जारी किए हैं। जिनमें न्यूनतम माफी वाले किसानों की ऋणमुक्ति के बारे में बताया गया है। ये हैं नौ पैसे से 57 रुपये तक की कर्जमाफी वाले किसानों के नाम…. 

बलिया नगीना 9 पैसे

चरन सिंह बास्टा 84 पैसे

रामधन आंकू 2 रुपये

हीरा मंडावर 3 रुपये

भागेश अफजलगढ़ 6 रुपये

रामसरन बिजनौर 16 रुपये

जसवंती नजीबाबाद चौक 21 रुपये

देव प्रताप चंदक 42 रुपये 36 पैसे

महेन्द्र बिजनौर 57 रुपये

अब यूपी के ही हमीरपुर का हाल जान लीजिए। यहां कैंप लगाकर किसानों को कर्जमाफी के सर्टिफिकेट बांटे गए थे। लेकिन सर्टिफिकेट लेने के बाद जब किसानों ने उन्हें देखा तो उनके पैरों तले की जमीन खिसक गई। मामला प्रभारी मंत्री तक भी पहुंचा। जिस पर उन्होंने जांच की बात कहते हुए इसे टाल दिया।

 

पाण्डाल में बैठे किसानों को प्रमाण पत्र बांटने की जिम्मेदारी उन्हीं के गांवों के लेखपालों को सौंपी गई थी। मंच पर प्रमाण पत्र वितरण के बाद नेताओं के उद्बोधन शुरू हुए। इसी बीच अंदर बैठे लेखपालों ने किसानों को प्रमाण पत्र बांटने शुरू कर दिए। बैंकों से प्राप्त इन प्रमाण पत्रों ने एक-दो नहीं बल्कि कई किसानों को हैरत और परेशानी में डाल दिया।

 

धनपुरा गांव के किसान शिवपाल को जो प्रमाण पत्र सौंपा गया उसमें उसके किसान क्रेडिट कार्ड में 20 हजार 271 रुपए माफ करने की घोषणा थी। किसान ने बताया कि उसके ऊपर बैंक का 93 हजार रुपया का ऋण है। लेकिन उसका कुल 20 हजार 271 रुपए माफ किया जा रहा है।

 

सबसे भद्दा मजाक महिला किसान शांति देवी के साथ हुआ। उमरी गांव की रहने वाली शांति के ऊपर 1.55 लाख रुपए का ऋण था। शांति का पुत्र प्रमाण पत्र लेने आया था, जिसे देखने के बाद वो सिर पकड़कर बैठ गया। उसे महज 10 रुपए 37 पैसे माफ करने का प्रमाण पत्र सौंपा गया था। दूसरा किसान उमरी गांव का मुन्नीलाल था। मुन्नीलाल के ऊपर बैंक का 40 हजार रुपए का ऋण था। लेकिन उसे 215 रुपए माफी का प्रमाण पत्र सौंपा गया।

 

आपको बता दें कि यूपी चुनावों से पहले बीजेपी ने घोषणा की थी कि सरकार बनते ही किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। वहीं बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने किसानों का एक लाख तक का कर्ज माफ करने का वादा किया था। बीजेपी का वादा छिपा हुआ था इसलिए किसानों को कर्ज से छुटकारा पाने की उम्मीद बंध गई। लेकिन बीजेपी की सरकार बनते ही उन्हें ठगी का एहसास हो गया।

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