Saturday, May 25, 2024
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Homeविदेशआप जानना चाहते है कि 'कोरोना से कब मिलेगा छुटकारा?' तो पढ़िए... 

आप जानना चाहते है कि ‘कोरोना से कब मिलेगा छुटकारा?’ तो पढ़िए… 

विश्व भर में कोरोना वायरस की महामारी फैलने के बाद, जीवन ठहर सा गया है और हर रोज़ हज़ारों लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अब हर किसी के दिमाग़ में बस एक ही सवाल है कि यह सब कब ख़त्म होगा?

 

इस सवाल का जवाब काफ़ी हद तक इन अनिश्चितताओं पर निर्भर करता है कि कोविड-19 जो लोगों की बीमारी और मौत का कारण बन रहा है, क्या कोई एक से ज़्यादा बार इससे संक्रमित हो सकता है और विश्व भर के वैज्ञानिक कितने जल्दी इसका वैक्सीन तैयार कर लेंगे?

तो यहां सबसे अहम सवाल यह है कि यह कब ख़त्म होगा?

एक आम विचार यह है कि महामारी केवल तथाकथित सामूहिक रोग प्रतिरोधक शक्ति (herd immunity) की स्थापना के साथ ही समाप्त होगी। ऐसा तब होता है जब किसी समुदाय के पर्याप्त लोग बीमारी से लड़ने की क्षमता हासिल कर लेते हैं, जिसके बाद वह उन्हें जकड़ नहीं पाती है और उनकी जान नहीं ले पाती है।

उस मंज़िल तक पहुंचने के दो रास्ते हैः एक है टीकाकरण। शोधकर्ताओं को एक वैक्सीन विकसित करनी होगी जो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ सुरक्षित व प्रभावी साबित हो, और पर्याप्त संख्या में इसकी आपूर्ति हो सके।

सामूहिक रोग प्रतिरोधक शक्ति की प्राप्ति का दूसरा रास्ता थोड़ा गंभीर हैः यह किसी समुदाय के एक बड़े हिस्से के बीमारी से संक्रमित होने के बाद हासिल होता है, और इस प्रकार से प्रतिरोध विकसित होता है।

उस वक़्त तक हम किस तरह मैनेज करें?

कई देशों की रणनीति है कि लॉकडाउन द्वारा व्यापार, व्यवसायों और स्कूलों को बंद करके, सामूहिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा कर और लोगों को उनके घरों में रखकर प्रसार की गति को धीमा कर दें। यह आइडिया संक्रमण की सूनामी को रोकने के लिए है, क्योंकि अगर यह सुनामी आ गई तो देश का पूरा मेडिकल सिस्टम ही बैठ जाएगा। इसलिए लॉकडाउन और प्रतिबंधों से बड़ी संख्या में मौतों को रोक दिया जाता है और इस दौरान सरकारों को समाधान जुटाने का समय मिल जाता है।

यह प्रतिबंध और पांबदियां कब हटेंगी?

लोगों को इतने जल्दी जीवन के सामान्य हो जाने की आशा नहीं करनी चाहिए। इतने जल्दी पाबंदियां हटाने का मतलब नया जोखिम मोल लेना है। इंग्लैंड के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी जेनी हैरीज़ का कहना है कि लॉकडाउन दो, तीन या आदर्श के तौर पर छह महीने तक जारी रखना होगा। लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में संक्रामक रोगों के प्रोफ़ेसर एनेलिस वाइल्डर-स्मिथ का मानना है कि जब तक दैनिक मामलों में कम से कम दो हफ़्तों तक लगातार गिरावट देखने में नहीं आए, प्रतिबंध जारी रहने चाहिएं।

ऐसी स्थिति में क्या हो सकता है?

अमरीकी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक समूह ने एक इंटरमीडिएट रोड मैप तैयार किया है, जिसमें स्कूलों और व्यवसायों को फिर से खोला जा सकता है, लेकिन आम सभाओं और लोगों की भीड़ के इकट्ठा होने पर फिर भी भी पांबदी रहेगी। लोगों को एक दूसरे से दूरी बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहेगा और अगर मामले फिर से बढ़ने लगते हैं तो प्रतिबंधों को दोबारा कड़ा कर दिया जाएगा।    

वैक्सीन तैयार होने में कितना समय लग सकता है?

दुनिया भर की सैकड़ों कंपनियां और विश्वविद्यालय इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि वे कब तक सफल होंगे। वैक्सीन विकसित करना आम तौर पर एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, उसे सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए परीक्षण में वर्षों तक लग जाते हैं। कोरोना वायरस की लड़ाई में मैदान में मौजूद कुछ खिलाड़ियों ने 12 से 18 महीनों में वैक्सीन देने का लक्ष्य रखा है। इसे एक असाधारण और महत्वाकांक्षी लक्ष्य कहा जा सकता है। हालाकि कुछ वैज्ञानिक नई तकनीकों पर भरोसा कर रहे हैं और वे मानव कोशिकाओं में वायरल जेनेटिक मटीरियल को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कोशिकाएं प्रोटीन बनाने के लिए प्रेरित होती हैं, और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया मज़बूत हो जाती है।

सामूहिक रोग प्रतिरोधक शक्ति या दूसरा रास्ता कैसे प्राप्त होगा?

यह तभी संभव होगा जब संक्रमण से ठीक होने वालों की प्रतिरोधक शक्ति स्थायी तौर पर बनी रहेगी। कोरोना वायरस के मामले में अभी तक इस संबंध में कुछ मालूम नहीं है। सामूहिक प्रतिरोधक शक्ति को स्थापित करने के लिए वायरस के संपर्क में कितनी बड़ी आबादी को आना होगा अभी यह भी ज्ञात नहीं है। आमतौर पर इसका प्रतिशत काफ़ी ज़्यादा होता है, उदाहरण के लिए डिप्थीरिया के लिए 75% और खसरा के लिए 91%, ब्रिटिश सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार पैट्रिक वालेंस ने फ़रवरी में 60% का अनुमान लगाया था। आवश्यक सीमा तक पहुंचने में कितना समय लगेगा यह सरकार द्वारा लाए गए उपायों पर निर्भर करेगा। कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि संक्रमित होने वाले लोगों की वास्तविक संख्या, पुष्टि होने वाले मामलों की तुलना में बहुत अधिक है। अगर यह सच है तो हम जितना जानते हैं, उससे कहीं अधिक प्रतिरोधक क्षमता के क़रीब हैं। (साभार: pars today)

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