Thursday, April 25, 2024
No menu items!
Homeउत्तर प्रदेशयुवाओ को उपदेश की नहीं रोज़गार की ज़रुरत है मोदी जी- मायावती

युवाओ को उपदेश की नहीं रोज़गार की ज़रुरत है मोदी जी- मायावती

यहाँ क्लिक कर हमारा फेसबुक पेज लाइक करें

लखनऊ। पूर्व राज्यसभा सांसद व यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री के शिकागो में आयोजित कार्यक्रम के संबोधन को निशाने पर लेकर जारी प्रतिक्रिया में आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को शिक्षा, रोजगार व सम्मान आदि तो दे नहीं पा रहे, लेकिन उपदेश पर उपदेश देते चले जा रहे हैं। वे कहते हैं कि युवाओं को मंदिर निर्माण से पहले शौचालयों का निर्माण करना चाहिए। लेकिन वे यह बात आरएसएस व बीजेपी वालों को क्यों नहीं समझाते और सरकार की शक्ति का सही इस्तेमाल करने से क्यों कतराते हैं?

मायावती ने कहा कि क्या सरकार की शक्ति का इस्तेमाल केवल गरीबों व मध्यम आय वर्ग वालों को परेशान करने के लिए नोटबंदी जैसे कार्य व किसानों को उनकी जमीन से बेदखल करने के लिए नया भूमि- अधिग्रहण कानून बनाने के लिए किया जाएगा? यह सरासर गलत है तथा सरकार के नैतिक पतन का ध्योतक भी है। ऐसी सरकार की बातों का लोगों पर क्या कोई अच्छा प्रभाव पड़ने वाला है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि, मैं यहां आया, पूरी ताकत से वंदे मातरम सुन रहा था, रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मैं पूरे हिंदुस्तान को पूछ रहा हूं क्या हमें वंदे मातरम कहने का हक है। मैं जानता हूं मेरी ये बात बहुत लोगों को चोट पहुंचाएगी। 50 बार सोच लीजिए, क्या हमें वंदे मातरम कहने का हक है? पान खाकर भारत मां पर पिचकारी मारे और फिर वंदे मातरम बोलें? हम लोग सारा कूड़ा कचरा भारत मां पर फेंकेंगे और फिर वंदे मातरम बोलें? इस देश में वंदे मातरम कहने का सबसे पहला हक अगर किसी को है, तो वे देश भर में सफाई कार्य करने वाले हैं। यह हक भारत माता की उन सच्ची संतानों को है जो सफाई कार्य करते हैं। लेकि न प्रश्न यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन बातों का स्वयं बीजेपी एंड कंपनी के लोगों पर इसका कोई असर पड़ने वाला है?

इसके अलावा मायावती ने हरियाणा का गुरुग्राम स्थित प्राइवेट स्कूल में छात्र के साथ हुए बर्बर व्यवहार और उसकी हत्या को दुखद व गंभीर बताते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राज्य का मसला नहीं है बल्कि यह पूरे देश की समस्या बनता जा रहा है। इसलिए केंद्र सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनाकर इस प्रकार की समस्याओं का समाधान करे ताकि देश में कहीं भी इस प्रकार की जघन्य घटनाएं नहीं हों।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments